इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को वॉशिंगटन पहुंचे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बैठक ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने रखा. दोनों नेताओं ने हाल ही में ईरान के न्यूक्लियर सेंटर पर किए गए संयुक्त हमलों की सफलता का जश्न मनाया, लेकिन उनकी एक तस्वीर ने ईरान को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यह तस्वीर बयां कर रही है कि अमेरिका और इजराइल की रणनीति अब ईरान के खिलाफ एक बड़े कदम की ओर बढ़ रही है.
ईरान पर हमला: ट्रंप और नेतन्याहू का साझा संदेश
इस तस्वीर में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों व्हाइट हाउस के अंदर एक साथ खड़े हैं, जिसमें दोनों एक नई रणनीति की ओर इशारा कर रहे हैं. उनका मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले के पीछे ईरान का हाथ था. दोनों नेताओं का कहना है कि यह हमला एक साजिश का हिस्सा था और अब वक्त आ गया है जब ईरान से इसका बदला लिया जाए.
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— The White House (@WhiteHouse) July 8, 2025
ट्रंप पर हमले के बाद की स्थिति
13 जुलाई 2024 को ट्रंप पर पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में एक चुनावी सभा के दौरान हमला हुआ था, जब वह मंच पर बोल रहे थे. इस हमले में ट्रंप के कान के पास से एक गोली गुजर गई थी, जो बड़ी घटना का कारण बन सकती थी. इसके लगभग दो महीने बाद, फिर से ट्रंप पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई थी, जब वह फ्लोरिडा में पाम बीच काउंटी के इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में थे. इन घटनाओं ने ईरान पर आरोपों का एक नया पहलू सामने रखा है, क्योंकि अमेरिकी न्याय विभाग ने दावा किया था कि इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ था.
ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप की जीत के बाद, ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत ठंडी रही थी. ईरान के राष्ट्रपति के प्रवक्ता फतेह मोहजेरानी ने कहा था कि ट्रंप की जीत से ईरान पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच नीतियां पहले से तय हैं. उनका यह बयान बताता है कि ईरान अपनी दिशा में कोई बदलाव नहीं करेगा, चाहे ट्रंप की सरकार हो या किसी और की.
इजराइल-ईरान तनाव और अमेरिका की भूमिका
हाल ही में इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का भी हाथ था. पिछले महीने 12 दिन तक चली संघर्ष में ट्रंप ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने इजराइली सेना को ईरान की मिसाइलों से बचाया और साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के न्यूक्लियर प्लांट को पूरी तरह से तबाह कर दिया. यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से निष्क्रिय करने के उद्देश्य से की गई थी, जो अब क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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