इजरायल-ईरान युद्ध के बीच भारत ने कर दिया बड़ा ऐलान, तेहरान में नेतन्याहू के हमले पर क्या कहा?

भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सतर्कता एडवाइजरी जारी की है.

Israel Iran war India issued warning
रणधीर जायसवाल | Photo: ANI

इजरायल और ईरान के बीच भड़की जंग अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है. हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सतर्कता एडवाइजरी जारी की है. इसमें भारतीयों से साफ तौर पर कहा गया है कि वे अनावश्यक आवाजाही से बचें और खुद को सुरक्षित स्थानों पर सीमित रखें. साथ ही, ईरान स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी सोशल मीडिया अपडेट और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों को फॉलो करने की अपील की गई है.

इजरायल का बड़ा हमला, ईरान को बड़ा झटका

शुक्रवार को इजरायल ने ईरान के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले किए, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की मौत हुई है, जिससे तेहरान की सैन्य और तकनीकी शक्ति को करारा झटका लगा है.

मारे गए प्रमुख ईरानी अधिकारी:

  • सरदार हुसैन सलामी – ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख
  • सरदार ग़ोलाम अली रशीद – ‘खतम अल अंबिया’ मिलिट्री बेस के कमांडर
  • डॉ. फेरेदून अब्बासी – प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक
  • डॉ. मोहम्मद अली तेहरांची – परमाणु अनुसंधान से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक

यूरेनियम फैसिलिटी पर सीधा वार

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने मध्य ईरान में स्थित यूरेनियम संवर्धन केंद्रों को टारगेट किया है. इनमें सबसे बड़ा हमला नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हुआ है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र मानी जाती है. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इन ठिकानों से उठता धुएं का गुबार और तबाही साफ देखी जा सकती है.

अमेरिका में बढ़ी हलचल, ट्रंप ने बुलाई आपात बैठक

इस हमले के बाद अमेरिका में भी कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में एक आपात कैबिनेट बैठक बुलाई है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह बैठक पहले से निर्धारित थी, लेकिन अब इसका फोकस पूरी तरह से ईरान-इजरायल संघर्ष और संभावित अमेरिकी प्रतिक्रिया पर केंद्रित कर दिया गया है. ट्रंप इससे पहले कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं होने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की नौबत आ सकती है. मौजूदा हालात को देखते हुए यह अंदेशा अब ज़मीन पर दिखाई देने लगा है.

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