Iran Nuclear Threat: ईरान और अमेरिका के बीच हालिया युद्धविराम के बाद भी मध्य-पूर्व में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है. इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में बड़ा बयान देकर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
उन्होंने साफ कहा कि ईरान से परमाणु खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है और आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. नेतन्याहू का यह बयान अमेरिका, ईरान और पूरी दुनिया के लिए अहम माना जा रहा है.
ईरान के पास 440 किलो संवर्धित यूरेनियम होने का दावा
अमेरिकी टीवी चैनल CBS को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के पास अभी भी 440 किलो 60% संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. उन्होंने कहा कि युद्धविराम अपनी जगह है, लेकिन परमाणु खतरा अभी खत्म नहीं हुआ. उनका कहना था कि अभी बहुत काम बाकी है और इजराइल इस खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा.
अमेरिकी मदद पर निर्भरता कम करने की तैयारी
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अब अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर कम निर्भर रहना चाहता है. उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में इजराइल जरूरत पड़ने पर बिना किसी बाहरी दबाव के खुद फैसले ले सकता है.
अमेरिका और इजराइल एक साथ
इंटरव्यू के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल साथ मिलकर काम कर रहे हैं और दोनों की सोच एक जैसी है. इस बयान के बाद माना जा रहा है कि आने वाले समय में ईरान को लेकर दोनों देशों का रुख और सख्त हो सकता है.
पाकिस्तान की मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकराया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के जरिए शांति का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इजराइल ने उसे मानने से इनकार कर दिया. इजराइल का कहना है कि जब तक ईरान अपना पूरा संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं भेजता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है.
क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 60% संवर्धित यूरेनियम को हथियार बनाने लायक स्तर तक पहुंचाने में ज्यादा समय नहीं लगता. वहीं, युद्धविराम लागू होने के बाद भी लेबनान में हिजबुल्लाह और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव जारी है. सूत्रों के मुताबिक, इजराइली सेना ने ईरान की परमाणु साइट्स को लेकर नई टारगेट लिस्ट भी तैयार कर ली है.
क्या इजराइल अकेले करेगा कार्रवाई?
नेतन्याहू के बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इजराइल जरूरत पड़ने पर अकेले भी बड़ा कदम उठा सकता है. दुनिया जहां शांति की उम्मीद कर रही है, वहीं इजराइल के सख्त तेवर यह दिखा रहे हैं कि आने वाले कुछ हफ्ते मध्य-पूर्व के लिए बेहद अहम हो सकते हैं. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे कूटनीति होगी या फिर हालात एक बार फिर युद्ध की तरफ बढ़ेंगे.
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