Agni-5 Missile: भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाते हुए अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास किया गया और इसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया. अग्नि-5 को भारत की सबसे उन्नत और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों में गिना जाता है.
अग्नि-5 की आधिकारिक रेंज 5000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है. हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता इससे भी अधिक हो सकती है. इतनी लंबी दूरी की वजह से यह मिसाइल एशिया के बड़े हिस्से को कवर करने में सक्षम मानी जाती है.
इस रेंज के भीतर यह पाकिस्तान और चीन के कई प्रमुख शहरों तक पहुंचने की क्षमता रखती है. इनमें चीन के बीजिंग, शंघाई, गुआंगझोउ, शेन्ज़ेन, चेंगदू और हांगकांग जैसे बड़े शहर शामिल हैं. वहीं पाकिस्तान की बात करें तो इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और कराची जैसे महत्वपूर्ण शहर इसकी जद में आते हैं.
क्यों है अग्नि-5 इतनी खास?
अग्नि-5 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी MIRV तकनीक है. इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग वॉरहेड ले जाने में सक्षम होती है. ये वॉरहेड उड़ान के दौरान अलग होकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. इस क्षमता की वजह से किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है.
अत्यधिक तेज गति
रिपोर्ट्स के अनुसार अग्नि-5 लगभग मैक 24 की गति से यात्रा कर सकती है, जो ध्वनि की गति से करीब 24 गुना तेज है. इतनी उच्च गति के कारण दुश्मन देशों के पास प्रतिक्रिया देने का समय बेहद सीमित हो जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता और बढ़ जाती है.
इसके अलावा यह मिसाइल कैनिस्टर-आधारित लॉन्च सिस्टम से लैस है, जिसका मतलब है कि इसे मोबाइल प्लेटफॉर्म- जैसे सड़क और रेल आधारित सिस्टम के जरिए आसानी से कहीं भी ले जाकर लॉन्च किया जा सकता है.
रणनीतिक क्षमता और सुरक्षा भूमिका
अग्नि-5 को विशेष रूप से भारत की रणनीतिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसकी लंबी दूरी और उन्नत तकनीक इसे एक मजबूत निवारक शक्ति (deterrent) बनाती है.
इसके अलावा रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें बंकर बस्टिंग क्षमता भी हो सकती है, जिससे यह जमीन के नीचे स्थित मजबूत सैन्य संरचनाओं और कमांड सेंटरों को भी निशाना बनाने में सक्षम मानी जाती है.
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