देश की इकोनॉमी के लिए कितना जरूरी है गोल्ड, भारत हर साल कितना सोना करता है इंपोर्ट? जानें सबकुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद देश में गोल्ड इंपोर्ट, मांग और अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

How much gold does India import every year essential for the economy
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद देश में गोल्ड इंपोर्ट, मांग और अर्थव्यवस्था पर इसके असर को लेकर चर्चा तेज हो गई है. भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से सोना खरीदता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारतीय अर्थव्यवस्था में गोल्ड की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है और इसका देश की वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है.

भारत कितना सोना आयात करता है?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता माना जाता है. आमतौर पर देश हर साल लगभग 700 से 900 टन तक सोने का आयात करता है. इसकी कुल कीमत करीब 50 से 60 अरब डॉलर या उससे अधिक तक पहुंच जाती है.

देश की घरेलू मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है, क्योंकि भारत में सोने का उत्पादन बेहद कम है. रिपोर्ट्स के अनुसार देश में हर साल सिर्फ 1 से 2 टन सोने का उत्पादन हो पाता है, जबकि खपत कई सौ टन तक रहती है.

अर्थव्यवस्था के लिए गोल्ड इतना जरूरी क्यों?

भारत में सोना सिर्फ निवेश या गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है. शादी-ब्याह, त्योहारों और पारंपरिक निवेश के रूप में गोल्ड की मांग लगातार बनी रहती है.

आर्थिक दृष्टि से देखें तो सोना अनिश्चित परिस्थितियों में सुरक्षित निवेश माना जाता है. जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक संकट गहराता है, तब लोग सोने की ओर रुख करते हैं. इसी वजह से गोल्ड को “सेफ हेवन एसेट” भी कहा जाता है.

हालांकि, बड़ी मात्रा में गोल्ड इंपोर्ट का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. सोने का आयात डॉलर में किया जाता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव बढ़ सकता है.

भारत के इंपोर्ट बिल में गोल्ड की हिस्सेदारी

भारत के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत बताई जाती है. कच्चे तेल के बाद गोल्ड देश की दूसरी सबसे बड़ी आयात श्रेणी मानी जाती है.

भारत पहले ही अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने दोनों की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार पर आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण ऊर्जा और उर्वरकों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसी वजह से सरकार अब गैर-जरूरी आयात को कम करने पर जोर दे रही है ताकि विदेशी मुद्रा का दबाव घटाया जा सके.

2026 में क्यों घटा गोल्ड इंपोर्ट?

2026 की शुरुआत में भारत में गोल्ड इंपोर्ट में बड़ी गिरावट देखने को मिली. जनवरी में जहां करीब 100 टन सोने का आयात हुआ था, वहीं फरवरी में यह घटकर लगभग 65-66 टन रह गया. मार्च में इसमें और गिरावट आई और आयात करीब 20-22 टन तक पहुंच गया.

कोविड काल को छोड़ दें तो यह पिछले लगभग तीन दशकों के सबसे निचले मासिक आयात स्तरों में से एक माना जा रहा है.

गिरावट के पीछे क्या वजहें रहीं?

सोने के आयात में गिरावट की कई वजहें सामने आई हैं. पहली वजह सोने की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं, जिससे मांग में कमी आई.

इसके अलावा सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी भी एक बड़ा कारण रही. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में गोल्ड इंपोर्ट अधिकृत बैंकों और सीमा शुल्क मंजूरी पर निर्भर करता है. वित्त वर्ष की शुरुआत में आयात की अनुमति देने वाली बैंक सूची अपडेट होने में देरी हुई, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई.

साथ ही टैक्स नियमों और कस्टम प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण भी आयात धीमा पड़ा.

पीएम मोदी की अपील का क्या मतलब?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से कुछ समय तक गोल्ड खरीदने से बचने की अपील की थी. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना और गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना बताया जा रहा है.

सरकार का फोकस फिलहाल ऐसे खर्चों को सीमित करने पर है, जिनसे आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा का ज्यादा उपयोग होता है.

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