Israel Election 2026: युद्ध के बाद इजराइल में पहली बार चुनाव, क्या फिर सत्ता में लौटेंगे नेतन्याहू?

इजराइल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होंगे. यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ हुए युद्धों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा.

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Israel Election 2026: इजराइल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होंगे. यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान और ईरान के साथ हुए युद्धों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा. इसलिए इसे देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. साथ ही यह चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य का भी बड़ा इम्तिहान होगा.

कुछ समय से चुनाव की तारीख को लेकर अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही थीं. मई में इजराइल की संसद (नेसेट) भंग होने के बाद जल्दी चुनाव होने की चर्चा थी. लेकिन सरकार की ओर से साफ कर दिया गया कि कानून के अनुसार मतदान 27 अक्टूबर को ही कराया जाएगा.

क्या फिर सत्ता में लौट पाएंगे नेतन्याहू?

हाल के कई सर्वे बताते हैं कि नेतन्याहू के राष्ट्रवादी और धार्मिक दलों के गठबंधन को इस बार मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि विपक्ष की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं दिख रही है और उसके लिए भी साफ बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा. चुनाव तक राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं.

76 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं. उन्होंने साफ कहा है कि वह चुनाव लड़ेंगे और दोबारा सरकार बनाने की कोशिश करेंगे.

सरकार बचाने में जुटे नेतन्याहू

चुनाव से पहले सरकार कई अहम कानून जल्द पास कराने की कोशिश कर रही है, ताकि गठबंधन मजबूत बना रहे.

नेतन्याहू का कहना है कि वह ऐसी राष्ट्रीय सरकार बनाना चाहते हैं, जो सिर्फ किसी एक विचारधारा पर नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा दलों के सहयोग से चले. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर नहीं होनी चाहिए. माना जा रहा है कि इस बार वह राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाएंगे.

सर्वे ने बढ़ाई चिंता

हाल के सर्वे नेतन्याहू के लिए अच्छी खबर नहीं दे रहे हैं. हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के एक सर्वे के मुताबिक, 92 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना है कि हालिया युद्ध के बाद ईरान पहले के मुकाबले मजबूत स्थिति में है.

वहीं, मार्च की शुरुआत में जहां 40.5 फीसदी लोग नेतन्याहू का समर्थन कर रहे थे, जून तक यह आंकड़ा घटकर 29.4 फीसदी रह गया.

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के दौरान हुई सुरक्षा चूक को लेकर भी लोगों में नाराजगी बनी हुई है. इसके अलावा अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद हुए युद्धविराम और तेहरान-वॉशिंगटन समझौते को भी कई लोग इजराइल के लिए बेहतर नहीं मानते.

चुनाव में कौन-कौन से मुद्दे रहेंगे?

इस बार चुनाव में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. इनमें अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों की सेना में भर्ती सबसे अहम माना जा रहा है. नेतन्याहू के सहयोगी चाहते हैं कि उनके समुदाय को सेना में भर्ती से छूट मिले, जबकि सेना और आम लोगों का कहना है कि लगातार युद्धों के कारण ज्यादा सैनिकों की जरूरत है.

इसके अलावा न्यायिक सुधार, नेतन्याहू पर चल रहे भ्रष्टाचार के मामले और गाजा युद्ध के बाद की स्थिति भी चुनाव में बड़े मुद्दे होंगे.

कौन दे रहा है चुनौती?

पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट को नेतन्याहू का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है. ऐसे में 27 अक्टूबर का चुनाव तय करेगा कि बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगे या इजराइल को नया प्रधानमंत्री मिलेगा.

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