'खूबसूरत हसीनाओं' के निशाने पर भारतीय युवा! ISI तैयार कर रहा हनीट्रैप नेटवर्क, एजेंसियां अलर्ट

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भारत के खिलाफ हनीट्रैप के जरिए जासूसी नेटवर्क चलाने का आरोप लगता रहा है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब इसे लेकर एक नई चुनौती सामने आने की बात कही जा रही है.

ISI honey-trap network Indian youth targeted by beautiful women
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भारत के खिलाफ हनीट्रैप के जरिए जासूसी नेटवर्क चलाने का आरोप लगता रहा है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब इसे लेकर एक नई चुनौती सामने आने की बात कही जा रही है. दावा है कि आईएसआई ऐसे नेटवर्क को भारत के अंदर से चलाने और इसके लिए एआई से बनाई गई नकली तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करने की तैयारी में है.

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, हनीट्रैप के जरिए लोगों को फंसाकर उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है. जांच के दौरान आम लोगों के साथ कुछ सरकारी और रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के भी ऐसे जाल में फंसने के मामले सामने आने की बात कही गई है.

छोटे शहरों पर आईएसआई की नजर

अधिकारियों के अनुसार, पहले ऐसे नेटवर्क के तार पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों से जुड़े होते थे. अब आईएसआई भारत के अंदर ही छोटे शहरों और कस्बों में नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर सकती है.

बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की जांच पहले भी सामने आई है. अब दक्षिण भारत के छोटे शहरों में भी इस तरह के नेटवर्क बनाने की कोशिश का दावा किया जा रहा है.

छोटे शहरों में लोगों को पैसे या दूसरे लालच के जरिए फंसाने की कोशिश की जा सकती है. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर खास नजर रख रही हैं.

खूबसूरत महिलाओं के जरिए जाल बिछाने का आरोप

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हनीट्रैप में सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता है. इसके बाद निजी बातचीत, तस्वीरों या आपत्तिजनक सामग्री के जरिए उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की जाती है.

रक्षा क्षेत्र से जुड़ी जानकारी हासिल करना ऐसे नेटवर्क का प्रमुख निशाना बताया जा रहा है. आरोप है कि कुछ मामलों में महिलाओं की पहचान का इस्तेमाल करके लोगों को भरोसे में लिया गया.

एआई ने बढ़ाई नई चुनौती

अब एआई के इस्तेमाल से यह खतरा और जटिल हो सकता है. नकली तस्वीरों और वीडियो के जरिए ऐसी पहचान बनाई जा सकती है, जिसके पीछे असल में कोई व्यक्ति मौजूद ही न हो.

इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे खातों और उनके पीछे काम करने वालों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. फर्जी तस्वीरों और वीडियो को पहचानने के लिए भी ज्यादा सावधानी की जरूरत होगी.

अग्निवीरों पर भी नजर होने का दावा

ताजा खुफिया जानकारी के हवाले से दावा किया जा रहा है कि आईएसआई की नजर नए भर्ती हुए अग्निवीरों पर भी है. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि सोशल मीडिया और हनीट्रैप के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जा सकता है.

अधिकारियों के मुताबिक, सेना से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी भी जासूसी नेटवर्क के लिए उपयोगी हो सकती है. इसलिए जवानों को सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क और निजी जानकारी साझा करने को लेकर लगातार सावधान किया जा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी चुनौती?

सूत्रों का दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के खिलाफ पाकिस्तान से जुड़े जासूसी प्रयासों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर और बढ़ी है. हालांकि, हनीट्रैप के मामलों में कितनी बढ़ोतरी हुई है, इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब सोशल मीडिया, फर्जी पहचान और एआई से तैयार सामग्री के इस्तेमाल से बने ऐसे जाल की पहचान करना है.