मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक कूटनीति के बीच पाकिस्तान एक नए विवाद में घिर गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार पर आरोप लगा है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अमेरिका को साझा की. यह दावा अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन ने अपने सूत्रों के हवाले से किया, जिसके बाद मामला अमेरिकी कांग्रेस तक पहुंच गया. हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है.
मार्को रुबियो और इशाक डार की मुलाकात में क्या हुआ?
विवाद की शुरुआत उस दावे से हुई जिसमें कहा गया कि हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इशाक डार की मुलाकात के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई थी. लैरी जॉनसन के अनुसार डार ने रुबियो को बताया कि यदि निकट भविष्य में ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है तो तेहरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है. दावा यह भी किया गया कि यह जानकारी सुनकर अमेरिकी विदेश मंत्री हैरान रह गए थे.
इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच जारी परमाणु वार्ताओं में पाकिस्तान को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में यदि पाकिस्तान का कोई वरिष्ठ अधिकारी किसी एक पक्ष को गोपनीय जानकारी देता है, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं. हालांकि अभी तक इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही चिंता बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस संवर्धन स्तर को 90 प्रतिशत तक पहुंचा दिया जाए तो उसका उपयोग परमाणु हथियार निर्माण में किया जा सकता है. यही कारण है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक बहस का विषय बना हुआ है.
अमेरिकी कांग्रेस में जब इस मुद्दे को उठाया गया तो विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी की जानकारी नहीं है और उन्होंने इस तरह की कोई बात नहीं सुनी है. इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि डार और रुबियो की मुलाकात में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं हुई थी. फिलहाल ईरान की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आरोप और खंडन के बीच यह मामला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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