तेल अवीव: गाजा पट्टी में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई एक नई शांति योजना पर विवाद गहराता जा रहा है. इस प्रस्ताव को लेकर हमास की ओर से नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जबकि इजरायल ने इसे स्वीकार कर लिया है. ऐसे में यह आशंका उठ रही है कि क्या यह प्रस्ताव जानबूझकर ऐसा तैयार किया गया है, जिसे हमास स्वीकार न करे, ताकि इसे आधार बनाकर गाजा पर इजरायल का नियंत्रण और सख्त किया जा सके.
इजरायली रक्षा मंत्री ने दी बड़ी चेतावनी
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि इजरायली सेना ने गाजा शहर के चारों ओर घेराबंदी को और मजबूत कर दिया है. उनका कहना है कि अब गाजा शहर को पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया जाएगा, जिससे हमास के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा सके.
उन्होंने बताया कि गाजा के पूर्व से पश्चिम तक फैले नेट्जरीम कॉरिडोर को भूमध्य सागर तक बढ़ा दिया गया है, ताकि हमास के बचाव के सभी रास्ते बंद किए जा सकें. अब जो लोग गाजा शहर से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें इजरायली चेकपोइंट से गुजरना होगा, और जो वहां रहेंगे उन्हें आतंकियों का समर्थक माना जाएगा.
ट्रंप की शांति योजना: हमास को आपत्ति
शांति योजना के अनुसार:
हालांकि, हमास इस योजना के कुछ अहम बिंदुओं पर आपत्ति जता चुका है. विशेषकर उसे अपने हथियार छोड़ने और गाजा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की शर्तें मंजूर नहीं हैं. एक वरिष्ठ हमास नेता ने बताया कि उनके संगठन को प्रस्ताव के कई हिस्सों पर "गंभीर आपत्तियां" हैं.
ट्रंप ने हमास को दी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया है कि यदि हमास ने कुछ ही दिनों में इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, तो उसके लिए "अंजाम बेहद बुरा" होगा. उनका दावा है कि यह योजना क्षेत्र में स्थायी शांति ला सकती है, लेकिन इसमें हमास की भागीदारी जरूरी है.
गाजा में नागरिकों की स्थिति बेहद गंभीर
गाजा शहर में अब भी लगभग 2.5 से 3.5 लाख लोग फंसे हुए हैं. इजरायल ने नागरिकों से दक्षिण की ओर पलायन करने को कहा है, लेकिन राहत संगठनों का कहना है कि लोग गरीबी, संसाधनों की कमी और अत्यधिक भीड़ के कारण सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) ने कहा है कि हालात बहुत ही चिंताजनक हैं. इजरायली हमलों में आम नागरिक मारे जा रहे हैं और जबरन विस्थापन हो रहा है. लाखों लोग भोजन, पानी, दवा और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं.
ICRC ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत, इजरायल की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह चाहे कोई क्षेत्र खाली करे या नहीं, वहां रह रहे नागरिकों की जान की सुरक्षा और मानवीय अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे.
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