नई दिल्ली: भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर जैसी सफलताओं के बाद, अब एक ऐसा हथियार तैयार हो रहा है जो मौजूदा मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. इस नए प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि यह मिसाइल 7400 किमी/घंटा (लगभग मैक 5–6) की हाइपरसोनिक रफ्तार से उड़ान भरने और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता रखेगी. यदि यह सफल होती है, तो यह मिसाइल रक्षा प्रणालियों जैसे THAAD, Iron Dome और यहां तक कि ब्रह्मोस जैसे अत्याधुनिक सिस्टम्स को भी चुनौती दे सकती है.
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 2025 के अंत तक एक नई हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करने की योजना बनाई है, जिसे उन्होंने ‘ध्वनि’ नाम दिया है. यह मिसाइल भारतीय हाइपरसोनिक कार्यक्रम में एक मील का पत्थर मानी जा रही है और देश की रणनीतिक शक्ति एवं घुसपैठ पर नियंत्रण क्षमता को एक नया आयाम दे सकती है.
हाइपरसोनिक ग्लाइड वेहिकल (HGV) प्रौद्योगिकी
ध्वनि मिसाइल श्रेणी में हाइपरसोनिक ग्लाइड वेहिकल (HGV) तकनीक का इस्तेमाल होगा. इस तकनीक की खासियत यह है कि:
इस प्रौद्योगिकी के कारण लक्ष्य तक पहुंचने के आखिरी क्षण में मिसाइल अपने रुख को बदल सकती है, जिससे विरोधी रडार और इंटरसेप्टर को चकमा देना आसान हो जाएगा.
स्क्रमजेट इंजन और HSTDV से मिली टेक्नोलॉजी
ध्वनि प्रोजेक्ट की नींव DRDO के HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle) कार्यक्रम द्वारा पहले से की गई प्रगति पर आधारित है. HSTDV ने स्क्रमजेट (supersonic combustion ramjet) इंजन प्रणाली का सफल परीक्षण किया है, जिसमें लगभग मैक 6 की गति हासिल की गई थी.
स्क्रमजेट इंजन की विशेषता यह है कि यह ऑक्सीजन को उच्च गति में प्रवाहित वायुमंडकीय हवा से खींचकर दहन प्रक्रिया को नियंत्रित करता है—जिससे लंबी दूरी पर हाइपरसोनिक उड़ान संभव हो पाती है. HSTDV के ग्राउंड परीक्षणों में 1,000 सेकंड से अधिक का रिकॉर्ड रन दर्ज हुआ, जिसने यह साबित किया कि इस तकनीक द्वारा निरंतर दहन अवस्था बनाए रख कर हाइपरसोनिक उड़ान संभव है.
क्यों यह मिसाइल बेहद खतरनाक मानी जा रही है?
ध्वनि मिसाइल अन्य पारंपरिक या आधुनिक मिसाइल प्रणालियों से कई मायनों में भिन्न होगी, और इसके पास कई विशेषताएँ हैं जो इसे दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण बना देंगी:
इन गुणों के चलते माना जा रहा है कि THAAD, Iron Dome या अन्य आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना बेहद कठिन होगा.
कुछ विशेषज्ञ यह तक दावा करते हैं कि ब्रह्मोस जैसी मिसाइल (जो पहले से ही उच्च गति और मारक क्षमता रखती है) इस हाइपरसोनिक मिसाइल के सामने फीकी पड़ सकती है.
विकास, परीक्षण और चुनौतियाँ
DRDO ने पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण ग्राउंड और फ्लाइट परीक्षण किए हैं, जो निम्न क्षेत्रों से जुड़े हैं:
इन परीक्षणों में सफलता मिली है, जिससे ‘ध्वनि’ मिसाइल अब उड़ान परीक्षण की अवस्था के और करीब आ गई है. अगर 2025 में पूर्ण पैमाने पर परीक्षण सफल होता है, तो भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास हाइपरसोनिक हथियारों की ऑपरेशनल क्षमता है.
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