परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहा पाकिस्तान? सिंध की पहाड़ियों में खोद रहा सुरंगें... रिपोर्ट में दावा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पहाड़ी इलाकों में हो रहे रहस्यमय निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है.

Is Pakistan preparing for nuclear test claim in report
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पहाड़ी इलाकों में हो रहे रहस्यमय निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना इन पहाड़ों के भीतर गहरी सुरंगें और भूमिगत कमरे बना रही है, जिन्हें लेकर आशंका जताई जा रही है कि यह किसी गुप्त परमाणु ठिकाने या हथियार भंडारण केंद्र की तैयारी हो सकती है.

यह खुलासा सिंधी नागरिक समाज संगठनों और सिंधुदेश आंदोलन के गठबंधन ने किया है. इन संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को औपचारिक पत्र लिखकर जांच की मांग की है.

गुप्त निर्माण की लोकेशन और आशंका

इन संगठनों ने अपने पत्र में दावा किया है कि सिंध प्रांत के कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना गुप्त निर्माण कार्य कर रही है.

बताया गया है कि सुरंगें और भूमिगत कमरे —

  • जमशोरो के उत्तर में नोरियाबाद के पास,
  • कंबर-शाहदादकोट जिले के आसपास,
  • और मंचर झील के पश्चिमी इलाके में बनाए जा रहे हैं.

संगठनों का कहना है कि यहां तीन स्तरों पर भूमिगत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें चौड़े सुरंग-मार्ग, कंक्रीट की सुरक्षा दीवारें और भूमिगत कक्ष शामिल हैं. यह निर्माण कार्य सेना की देखरेख में अत्यंत गोपनीय तरीके से चल रहा है.

स्थानीय नागरिकों को इन इलाकों में जाने से रोका गया है. रिपोर्टों के अनुसार, यहां कड़े सुरक्षा घेरे में सीमित सैन्य कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ काम कर रहे हैं.

परमाणु परीक्षण या भंडारण की संभावना

सिंधी समूहों ने अपने पत्र में कहा है कि उपलब्ध उपग्रह चित्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह जगह परमाणु-संबंधी गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है.

उनका दावा है कि पाकिस्तान यहां या तो नए परमाणु हथियारों के परीक्षण की तैयारी कर रहा है या फिर परमाणु सामग्री के सुरक्षित भंडारण केंद्र का निर्माण कर रहा है ताकि ये क्षेत्र भारत या अन्य बाहरी हस्तक्षेप से दूर रहें.

संगठनों ने कहा कि यदि इन स्थानों पर वास्तव में परमाणु सामग्री मौजूद है, तो यह रेडियोधर्मी प्रदूषण और पर्यावरणीय आपदा का कारण बन सकता है.

UN और IAEA को भेजा गया पत्र

इन समूहों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, IAEA, संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों का कार्यालय (UNODA) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) को एक विस्तृत पत्र भेजा है.

पत्र में मांग की गई है कि —

  • इन स्थलों पर तत्काल अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण किया जाए.
  • IAEA अपने सत्यापन प्रोटोकॉल के तहत यह जांच करे कि क्या ये निर्माण कार्य परमाणु अप्रसार संधि (NPT) या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं.
  • यदि आवश्यक हो, तो अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा जाए.

यह पत्र जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज के अध्यक्ष शफी बुरफत ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर सार्वजनिक किया है.

पर्यावरण और मानवाधिकार को लेकर चिंता

पत्र में यह भी कहा गया है कि इस निर्माण से स्थानीय पर्यावरण, जल स्रोतों और जनस्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है. समूहों ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और OHCHR से अनुरोध किया है कि वे एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन गठित करें, जो इन गतिविधियों के प्रभाव का मूल्यांकन करे.

रिपोर्ट के अनुसार, ये सुरंगें मंचर झील के पास स्थित हैं, जो सिंध क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत है. यदि वहां परमाणु सामग्री रखी जाती है या कोई रिसाव होता है, तो यह न केवल सिंध बल्कि पूरे दक्षिण पाकिस्तान के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकता है.

पत्र की प्रमुख मांगें और सुझाव

पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं —

  • अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को साइट निरीक्षण की अनुमति दी जाए.
  • स्थानीय नागरिकों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे प्रतिशोध के डर के बिना जानकारी साझा कर सकें.
  • एक पारदर्शी रिपोर्टिंग मैकेनिज्म बनाया जाए ताकि गलत सूचना को रोका जा सके.
  • संभावित रेडियोलॉजिकल घटनाओं से निपटने के लिए आपातकालीन योजना तैयार की जाए.
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सूचित रखने के लिए नियमित पर्यवेक्षण रिपोर्टें प्रकाशित की जाएं.

पत्र में यह भी कहा गया है कि “यह पहल किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं है, बल्कि इसका मकसद क्षेत्रीय शांति, पर्यावरणीय सुरक्षा और नागरिकों की जान की रक्षा करना है.”

अब तक पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. हालांकि, सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान ने पहले भी बलूचिस्तान के चागई क्षेत्र में 1998 में परमाणु परीक्षण किए थे, और सिंध का इलाका भौगोलिक रूप से ऐसी गतिविधियों के लिए सुरक्षित और दूरस्थ स्थान माना जा सकता है.

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