पश्चिम एशिया में तनाव फिर से चरम पर है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश जंग नहीं चाहता, लेकिन यदि अमेरिका या इज़राइल ने हमला किया, तो ईरान उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. राष्ट्रपति ने यह बयान एक रिकॉर्ड किए गए टीवी इंटरव्यू के ज़रिए दिया, जिसमें उन्होंने देश की एकता और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि बताया.
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल का मक़सद ईरान को अंदर से कमजोर करना है. उनके मुताबिक, “कोई भी ईरानी यह नहीं चाहता कि हमारा देश बिखरे. हमारे लोग एकजुट हैं, और हम अपने वजूद की हिफाज़त करना जानते हैं.”
पिछली लड़ाई में दोनों पक्षों को भारी नुकसान
13 जून को इज़राइल ने ईरान के कई परमाणु और सैन्य प्रतिष्ठानों पर एयरस्ट्राइक की थी. इस हमले में 1,000 से अधिक ईरानी मारे गए, जिनमें कई उच्चस्तरीय वैज्ञानिक और सेना के कमांडर शामिल थे. इसके बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से इज़राइल को जवाब दिया, जिसमें कई दर्जन इज़राइली नागरिकों की जान गई.
इस तनाव के बीच अमेरिका भी मैदान में उतरा और उसने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर बमबारी की. 24 जून को युद्धविराम हुआ, लेकिन इससे पहले ही ईरान ने कतर स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया. इस पूरे संघर्ष में ईरान में 600 से अधिक लोग मारे गए और 5,000 से ज्यादा घायल हुए. वहीं, इज़राइल ने 28 जानें गंवाईं और करीब 3,000 लोग घायल हुए.
समुद्र से जवाब की तैयारी में ईरान की नौसेना
ईरानी नौसेना ने हाल ही में ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया है. यह युद्धाभ्यास इज़राइल को यह संदेश देने के लिए काफी है कि अगर हमला हुआ तो ईरान समुद्र के रास्ते भी आक्रामक जवाब देने में सक्षम है. पिछले संघर्ष से सबक लेते हुए ईरान ने अपने सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है. रक्षा प्रणालियों को अपग्रेड किया गया है और सतर्कता को उच्चतम स्तर पर रखा गया है.
परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बढ़ी हलचल
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, उसे इस दिशा में रूस और चीन का समर्थन प्राप्त है. साथ ही, ईरान ने वैश्विक मंचों पर कूटनीतिक प्रयास भी तेज कर दिए हैं ताकि अपने कार्यक्रम को वैध और सफल बनाया जा सके. हालांकि, ये कूटनीतिक गतिविधियां न तो इज़राइल को रास आ रही हैं और न ही अमेरिका को. इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों ही ईरान की एटमी महत्वाकांक्षाओं से स्पष्ट रूप से असहज हैं. सूत्रों का कहना है कि ट्रंप, यदि सत्ता में लौटते हैं, तो वे इज़राइल को एक और सैन्य कार्रवाई की छूट दे सकते हैं.
क्या फिर भड़केगा युद्ध?
क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो इज़राइल और ईरान के बीच दूसरा बड़ा युद्ध कभी भी शुरू हो सकता है. दोनों देशों के बीच की खाई और अविश्वास दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है. ऐसे में इस पूरे क्षेत्र के लिए अगले कुछ हफ्ते निर्णायक हो सकते हैं.
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