Verisheh Moradis Death Sentence Case: ईरान के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में राजनीतिक कैदी वरीशे मोरादी (जिन्हें जोवाना सनेह के नाम से भी जाना जाता है) की मौत की सजा को रद्द कर दिया है. वरीशे मोरादी, जिन्हें 2023 में सशस्त्र विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, को पहले एक विवादास्पद प्रक्रिया के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि जांच में कई कानूनी गलतियां हुईं और आरोपों को स्पष्ट तरीके से नहीं पेश किया गया, जिससे इस फैसले को पलटने की आवश्यकता पड़ी.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
वरीशे मोरादी की मौत की सजा को रद्द करने के बाद मामला फिर से तेहरान की क्रांतिकारी अदालत की शाखा 15 में भेज दिया गया है, जो इस मामले की पुनः सुनवाई करेगी. इस अदालत के प्रमुख, अबोलघासेम सलावती, ने ही पहले वरीशे को मौत की सजा सुनाई थी. यह मामला अब फिर से उसी अदालत में सुना जाएगा, जहां पहले से कई विवाद उठ चुके हैं.
अगस्त 2023 में हुई थी गिरफ्तारी
वरीशे मोरादी को 1 अगस्त 2023 को सशस्त्र विद्रोह और अन्य आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार करने के दौरान उन्हें बुरी तरह पीटा गया था, खासकर सनंदज के पास. फिर, 10 नवंबर 2024 को उन्हें विद्रोही गतिविधियों के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई. हालांकि, इस सजा के खिलाफ लगातार विरोध हुआ, और अब सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को रद्द कर दिया है.
जेल में भूख हड़ताल और संघर्ष
सजा के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए वरीशे मोरादी ने 2024 में जेल में 20 दिन की भूख हड़ताल की थी. उन्होंने जेल से ही अपनी लिखित अपील तैयार की और ईरानी जनता से अपील की कि उनके कार्य और संघर्ष को सामाजिक न्याय के आधार पर देखा जाए. उन्होंने इस पत्र में लिखा था, "ISIS हमें सिर काट रहा है और इस्लामी गणराज्य हमें फांसी दे रहा है. कोई भी राजनीतिक या कानूनी ज्ञान इस विरोधाभास को नहीं समझा सकता."
मोरादी की फांसी के खिलाफ ईरानी जनता का विरोध
मोरादी की मौत की सजा के खिलाफ कई नागरिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, और राजनीतिक हस्तियों ने विरोध किया था. उन्होंने लगातार इस बात की मांग की कि वरीशे की फांसी को रोका जाए. 240 से अधिक नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मोरादी के खिलाफ मौत की सजा के गंभीर खतरे के बारे में चेतावनी दी थी. वे उसे महिला अधिकार कार्यकर्ता मानते थे और यह भी कहा कि वह ISIS के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय थीं.
ईरान में राजनीतिक कैदियों का संकट
ईरान में रोजाना आपराधिक मामलों में मौत की सजा दी जाती है, लेकिन राजनीतिक मामलों में भी कई कैदी इस खतरे का सामना कर रहे हैं. वर्तमान में करीब 70 राजनीतिक कैदी ऐसे हैं, जिनकी जान पर कभी भी खतरा मंडरा सकता है. इसके अलावा, 100 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिन पर राजनीतिक आरोपों के तहत मौत की सजा का खतरा बना हुआ है. इस स्थिति में सुधार की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ रही है.
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