ईरान का USA पर पलटवार, अमेरिकी मिलिट्री बेस पर बरसाई मिसाइलें, ड्रोन से भी किया अटैक, कई सैनिकों की मौत का दावा

US Iran War: अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जॉर्डन और बहरीन समेत खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है.

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US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से चला आ रहा तनाव एक बार फिर खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है. अमेरिका की ओर से ईरान के दक्षिणी हिस्सों में ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद तेहरान ने जवाबी हमलों का ऐलान किया है. इसी कड़ी में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन में अमेरिकी मरीन के कैंप टिटिन को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया है. हालांकि, ईरान के उस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है जिसमें बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई है.

जॉर्डन में अमेरिकी मरीन कैंप पर बैलिस्टिक मिसाइलें

IRGC के मुताबिक, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अकाबा की खाड़ी के तट पर स्थित अमेरिकी मरीन सुविधा कैंप टिटिन पर भारी बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया. ईरानी पक्ष ने दावा किया कि हमले में अमेरिकी सैनिकों के साथ कई सैन्य सुविधाओं और हमलावर हेलीकॉप्टरों को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, इन दावों की पुष्टि अमेरिका या किसी स्वतंत्र स्रोत ने नहीं की है. दूसरी ओर, जॉर्डन की सेना ने बताया कि ईरान की ओर से उसके हवाई क्षेत्र में 13 बैलिस्टिक मिसाइलें दाखिल हुईं. इनमें से 10 को जॉर्डन की एयर डिफेंस प्रणाली ने रोक दिया, जबकि तीन मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं. जॉर्डन ने किसी के घायल होने या जान जाने की पुष्टि नहीं की है.

बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकाना निशाने पर

ईरान की जवाबी कार्रवाई केवल जॉर्डन तक सीमित नहीं रही. ईरानी मीडिया और IRGC से जुड़े बयानों में बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है. रिपोर्टों में शेख ईसा एयर बेस का नाम सामने आया है, हालांकि इन हमलों और उनसे हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है. इस घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. जॉर्डन के अलावा कुवैत में भी मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर सैन्य अलर्ट की खबरें सामने आई हैं. इससे आशंका बढ़ गई है कि ईरान-अमेरिका का मौजूदा टकराव क्षेत्र के दूसरे देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है.

अमेरिका ने क्यों किया ईरान पर हमला?

अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की पुष्टि की है. वॉशिंगटन का कहना है कि ये कार्रवाई ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों और अमेरिकी सैन्यकर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशों के जवाब में की गई. अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमलों की शुरुआत की. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका की ताजा कार्रवाई में बंदर अब्बास, चाबहार, कोनारक, जास्क, सिरिक, किश द्वीप और अन्य इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आईं. ईरानी अधिकारियों ने कुछ हमलों में नागरिकों के हताहत होने का भी दावा किया है.

होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण- गालिबाफ का दावा

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तेहरान का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर ईरान का नियंत्रण है और यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर हालात अब पहले जैसे नहीं हैं. गालिबाफ ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके सहयोगी हाइब्रिड युद्ध के जरिए ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उनके मुताबिक, कूटनीतिक दबाव के जरिए ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ सकता है. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की लंबे समय तक बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर डाल सकती है. हालिया संघर्ष के बीच तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है. ईरान दक्षिणी हिस्से में समुद्री यातायात को लेकर ओमान के साथ व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीं, खाड़ी क्षेत्र के अन्य देश भी होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना शर्त जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर जोर दे रहे हैं.

ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी

ईरानी सशस्त्र बलों और IRGC ने अमेरिका को आगे भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखती है तो उसे और गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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