Iran US Tension: पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हालिया अमेरिका यात्रा के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि ईरान ने उनके जरिए वॉशिंगटन को एक गुप्त संदेश भेजा है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस बात को लेकर काफी अटकलें लगाई गईं. लेकिन अब ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्रीय टीवी पर संबोधन देते हुए इन दावों को पूरी तरह झूठ और मनगढ़ंत बता दिया.
खामेनेई ने अपने बयान में साफ किया कि कुछ विदेशी मीडिया संगठन जानबूझकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि ईरान किसी तीसरे देश के जरिए अमेरिका तक संदेश पहुंचा रहा है. उनका कहना था, “यह दावा न केवल गलत है, बल्कि एक सोची-समझी अफवाह है. ईरानी सरकार ने अमेरिका को ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा.”
बताया जा रहा था कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सऊदी क्राउन प्रिंस को जो चिट्ठी दी, उसमें अमेरिका को शांतिपूर्ण संकेत भेजे गए थे. लेकिन ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वह पत्र सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों पर था, अमेरिका के लिए नहीं.
चिट्ठी के दावों पर अस्पष्टता, लेकिन बातचीत की कोशिशें पहले भी हो चुकीं
कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि पेजेशकियन की चिट्ठी में यह संदेश था कि ईरान किसी नए टकराव का इच्छुक नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना चाहता है और कूटनीति के जरिए न्यूक्लियर विवाद सुलझाने को तैयार है, शर्त यह कि उसके अधिकार सुरक्षित रहें.
दरअसल, इस साल अप्रैल से जून के बीच ईरान और अमेरिका के बीच ओमान की मध्यस्थता में पांच राउंड की बातचीत भी हो चुकी है. छठे दौर की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन तभी घटनाओं ने खतरनाक मोड़ ले लिया.
इजरायल-ईरान झड़पों से बढ़ा तनाव, अमेरिका भी मैदान में उतरा
इजरायल ने अचानक ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए, जिनमें ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिक और सेना के वरिष्ठ कमांडर मारे गए. इसका जवाब देते हुए तेहरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए.
इसके बाद 22 जून को अमेरिकी सेना ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान में ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया. अगले दिन ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाकर पलटवार किया. इस तनाव ने पूरे मध्य-पूर्व को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया था.
खामेनेई का दावा, अमेरिका को भारी नुकसान
ईरान और इजरायल के बीच 24 जून से सीजफायर लागू हुआ. इससे पहले 12 दिनों तक चलने वाली इस झड़प को लेकर खामेनेई ने अमेरिका पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा, “इस बारह दिनों के युद्ध में अमेरिका को बहुत बड़ा नुकसान हुआ. उसने अपनी सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों, लड़ाकू विमानों और पनडुब्बियों का उपयोग किया, लेकिन फिर भी अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका.” यह बयान केवल संघर्ष पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति पर सीधा निशाना था.
तनाव कम नहीं, समीकरण लगातार बदल रहे हैं
जहां एक तरफ ईरान अफवाहों को खारिज कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ उसके रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है. सऊदी अरब की भूमिका, इजरायल-ईरान संघर्ष, और अमेरिकी हस्तक्षेप, तीनों मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में वेस्ट एशिया का राजनीतिक समीकरण और जटिल होने वाला है.
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