कौन हैं ईरान के कट्टर दुश्मन रॉफेल ग्रॉसी? जो बन सकते हैं यूएन के अगले चीफ, कई देशों ने किया समर्थन

दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद के लिए चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. अर्जेटिना ने इस पद के लिए रॉफेल ग्रॉसी का नाम आगे बढ़ाया है. अर्जेटिना की लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने औपचारिक रूप से ग्रॉसी को यूएन के अगले महासचिव के लिए नामित किया है.

Who is Rafael Grossi who could become the next UN chief
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Who is Rafael Grossi: दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद के लिए चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. अर्जेटिना ने इस पद के लिए रॉफेल ग्रॉसी का नाम आगे बढ़ाया है. अर्जेटिना की लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने औपचारिक रूप से ग्रॉसी को यूएन के अगले महासचिव के लिए नामित किया है. इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव भेजने की योजना बनाई जा रही है. हालांकि, इस नामांकन से जुड़ी जटिलताएं और राजनीतिक विवाद भी उभरने लगे हैं.

रॉफेल ग्रॉसी: अर्जेटिना का चर्चित नाम

रॉफेल ग्रॉसी, जो अर्जेटिना के नागरिक हैं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के वर्तमान प्रमुख हैं. उनकी प्रतिष्ठा एक सशक्त और साहसी नेतृत्वकर्ता के रूप में बनी है, हालांकि उनका नाम ईरान के लिए विवादास्पद रहा है. ग्रॉसी को ईरान का कट्टर विरोधी माना जाता है, और उनकी रिपोर्ट ने दोनों देशों के रिश्तों को और भी तकरारपूर्ण बना दिया. 2019 से IAEA के प्रमुख रहने वाले ग्रॉसी की कार्रवाइयों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख हस्ती बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही उनके खिलाफ कई विवाद भी उठे हैं.

ग्रॉसी की रिपोर्ट और ईरान के साथ तनाव

ग्रॉसी की एक रिपोर्ट ने जब ईरान पर आरोप लगाया कि वह जल्द ही परमाणु बम बना सकता है, तो इस रिपोर्ट ने पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में हलचल मचा दी. रिपोर्ट के आधार पर, इज़राइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमला किया, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया. बाद में अमेरिका ने भी अपनी बी-2 बम से ईरान पर हमला किया. इस हमले को लेकर ईरान ने ग्रॉसी को जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज की. इतना ही नहीं, ईरान के कट्टरपंथी मीडिया ने ग्रॉसी के खिलाफ फतवा भी जारी किया, जो उनके लिए एक बड़ा विवाद खड़ा करने वाला तत्व बन गया.

क्या ग्रॉसी बन पाएंगे यूएन के अगले प्रमुख?

ग्रॉसी की उम्मीदवारी को अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन उनके लिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद तक पहुंचना इतना आसान नहीं होगा. यूएन के चार्टर के अनुसार, महासचिव के पद के लिए चुनाव दो चरणों में आयोजित होते हैं. पहले चरण में, यूएन सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखा जाता है, जिसे कोई स्थाई सदस्य वीटो न करे. इसके बाद, जनरल असेंबली में भी उसी प्रस्ताव पर वोटिंग होती है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है.

चीन और रूस के वीटो की बाधा

रॉफेल ग्रॉसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन और रूस से वीटो का सामना करना हो सकता है. जबकि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों का समर्थन उनके साथ है, चीन और रूस ने पहले ही ग्रॉसी के कामकाजी तरीके पर सवाल उठाए हैं. ईरान के साथ उनकी नीतियों के कारण, यह दोनों देशों ग्रॉसी के खिलाफ वीटो कर सकते हैं, जिससे उनकी उम्मीदवारी पर संकट मंडरा सकता है. यदि चीन और रूस इस नामांकन को वीटो करते हैं, तो ग्रॉसी यूएन के महासचिव नहीं बन पाएंगे, भले ही अन्य देश उनका समर्थन करें.

ईरान की भूमिका और भविष्य की चुनौतियां

ईरान की भी पूरी कोशिश रहेगी कि रॉफेल ग्रॉसी यूएन महासचिव ना बनें, क्योंकि ग्रॉसी के खिलाफ उनका गुस्सा और विवाद अभी भी कायम है. ईरान की विदेश नीति और परमाणु मुद्दे पर ग्रॉसी के दृष्टिकोण ने दोनों देशों के रिश्तों को खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. ऐसे में, ईरान ग्रॉसी के खिलाफ लobbying कर सकता है और उनकी उम्मीदवारी को मुश्किल बना सकता है.

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