US Iran War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. युद्ध और टकराव को खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने शांति की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है. गुरुवार (21 मई, 2026) को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने साफ कर दिया कि देश में मौजूद समृद्ध यानी इनरीच्ड यूरेनियम का भंडार किसी भी हालत में ईरान से बाहर नहीं जाएगा.
ईरान ने यूरेनियम भंडार पर अपनाया सख्त रुख
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों ने जानकारी दी है कि अयातुल्लाह मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका की प्रमुख मांगों में से एक को खारिज करने का संकेत दिया है. दरअसल, अमेरिका लंबे समय से यह चाहता रहा है कि ईरान अपने ज्यादातर इनरीच्ड यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजे, ताकि परमाणु हथियार बनाने की आशंका को कम किया जा सके.
लेकिन अब ईरान के सर्वोच्च नेता ने साफ कर दिया है कि मौजूदा यूरेनियम भंडार ईरान में ही रहेगा. ऐसे में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और ज्यादा जटिल होती दिखाई दे रही है.
ट्रंप ने इजरायल को क्या भरोसा दिया?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल के अधिकारियों ने रॉयटर्स से बातचीत में दावा किया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को आश्वासन दिया था कि किसी भी संभावित शांति समझौते में ईरान के अधिकतर इनरीच्ड यूरेनियम भंडार को हटाने की शर्त जरूर शामिल होगी.
इजरायल लंबे समय से इस मुद्दे को अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता रहा है. यही वजह है कि तेल अवीव लगातार अमेरिका पर दबाव बनाता रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कई पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इन आरोपों को और बल तब मिला जब ईरान ने यूरेनियम को 60 फीसदी तक समृद्ध कर लिया.
विशेषज्ञों के मुताबिक, 60 फीसदी तक यूरेनियम को इनरीच्ड करना सामान्य नागरिक जरूरतों से कहीं ज्यादा है और इसे परमाणु हथियार निर्माण के बेहद करीब माना जाता है. हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
नेतन्याहू ने रखीं युद्ध खत्म करने की शर्तें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख इस मुद्दे पर बेहद सख्त बना हुआ है. उनका कहना है कि जब तक ईरान अपने इनरीच्ड यूरेनियम भंडार को हटाने के लिए तैयार नहीं होता, प्रॉक्सी मिलिशिया को समर्थन देना बंद नहीं करता और अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को खत्म नहीं करता, तब तक यह संघर्ष समाप्त नहीं हो सकता.
नेतन्याहू का मानना है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताएं पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं. यही कारण है कि इजरायल किसी भी समझौते में इन मुद्दों को शामिल करने पर जोर दे रहा है.
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