Suryastra Rocket Trial: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए स्वदेशी रॉकेट सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ का सफल परीक्षण किया है. ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में बुधवार को इस अत्याधुनिक रॉकेट सिस्टम का प्रदर्शन किया गया. यह परीक्षण भारतीय रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. खास बात यह है कि ‘सूर्यास्त्र’ पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसे निजी रक्षा कंपनी नाइब लिमिटेड ने विकसित किया है.
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी बेहद सटीक मारक क्षमता है. यह रॉकेट सिस्टम दुश्मन के बंकर, कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैन्य ठिकानों को अत्यंत सटीकता के साथ निशाना बना सकता है. परीक्षण के दौरान इसकी अचूक क्षमता ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं.
#WATCH | In a major boost for Indian defence forces, private sector firm Nibe Limited has successfully carried out the firing demonstration of the Suryastra rockets of 150 km and 300 Km range in ITR Chandipur Orissa. The rockets achieved CEP of 1.5 meters and 2 meters… pic.twitter.com/9qgVI913ap
— ANI (@ANI) May 20, 2026
300 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर सटीक प्रहार
सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम के दो अलग-अलग परीक्षण किए गए. पहले परीक्षण में रॉकेट को 300 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य पर दागा गया. इस दौरान रॉकेट ने महज 2 मीटर का सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी (CEP) हासिल किया, जो इसकी उच्च सटीकता को दर्शाता है.
दूसरे परीक्षण में इसे 150 किलोमीटर की दूरी वाले लक्ष्य पर दागा गया, जहां यह अपने लक्ष्य से केवल 1.5 मीटर के दायरे में जाकर फटा. रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इतनी सटीकता आधुनिक युद्ध में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे कम समय में दुश्मन के अहम ठिकानों को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता है.
क्या है सूर्यास्त्र की खासियत?
सूर्यास्त्र एक यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर लॉन्चर सिस्टम है. इसका मतलब यह है कि एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग दूरी और क्षमता वाले रॉकेट दागे जा सकते हैं. इस सिस्टम से 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज के रॉकेट लॉन्च किए जा सकते हैं. इसके अलावा 100 किलोमीटर तक मार करने वाले अन्य घातक रॉकेट और ड्रोन भी इससे संचालित किए जा सकते हैं.
विशेषज्ञ इसे अमेरिका के HIMARS रॉकेट सिस्टम की श्रेणी का मान रहे हैं. हालांकि सूर्यास्त्र पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित है और इसे भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. इसकी सटीकता और बहुउद्देश्यीय क्षमता इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद प्रभावी हथियार बनाती है.
भारतीय सेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा
सूर्यास्त्र की तैनाती के बाद भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. यह सिस्टम सीमा पार किए बिना दुश्मन के सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाने में सक्षम होगा. कमांड सेंटर, रडार स्टेशन, हथियार डिपो और रणनीतिक ठिकानों को दूर से ही निशाना बनाया जा सकेगा.
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाले हथियारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. ऐसे में सूर्यास्त्र जैसे स्वदेशी सिस्टम भारत को सामरिक बढ़त दिला सकते हैं.
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
इस सफलता को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार स्वदेशी रक्षा उपकरणों और मिसाइल प्रणालियों के विकास पर जोर दे रहा है. सूर्यास्त्र का सफल परीक्षण यह दिखाता है कि अब भारत केवल रक्षा आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी जरूरतों के लिए अत्याधुनिक हथियार खुद विकसित कर रहा है.
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सूर्यास्त्र भारतीय सेना के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. इसकी सटीक मारक क्षमता, लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता और मल्टी-कैलिबर लॉन्चिंग सिस्टम इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में बेहद घातक और प्रभावी बनाते हैं.
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