El Nino Effect: इस साल गर्मी को लेकर वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. वजह है प्रशांत महासागर में तेजी से बन रही ‘सुपर एल नीन्यो’ जैसी स्थिति. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह प्रणाली पूरी तरह सक्रिय हो गई, तो दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, सूखा और मौसम का असामान्य बदलाव देखने को मिल सकता है. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा. खासतौर पर उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों में इसका असर बेहद गंभीर हो सकता है.
आम तौर पर लोग हर कुछ साल में ‘एल नीन्यो’ का नाम सुनते हैं, लेकिन बहुत कम लोग समझते हैं कि आखिर यह होता क्या है और इसका भारत के मौसम से क्या संबंध है. इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि विशेषज्ञ इसे सामान्य एल नीन्यो नहीं बल्कि ‘सुपर एल नीन्यो’ बनने की आशंका जता रहे हैं. अगर ऐसा हुआ तो गर्मी के कई पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं और मानसून पर भी बड़ा असर पड़ सकता है.
आखिर क्या होता है एल नीन्यो?
एल नीन्यो एक मौसम संबंधी प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर में होने वाले तापमान परिवर्तन से जुड़ी होती है. यह शब्द स्पेनिश भाषा से आया है. स्पेनिश में ‘एल नीन्यो’ का मतलब होता है ‘छोटा बच्चा’ या ‘बालक’.
यह नाम दक्षिण अमेरिका के मछुआरों ने दिया था. दरअसल, हर कुछ साल में दक्षिण अमेरिका के समुद्री तट के पास समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता था. यह बदलाव खासतौर पर क्रिसमस के आसपास दिखाई देता था, इसलिए इसका नाम ‘एल नीन्यो’ रख दिया गया.
हालांकि यह घटना दक्षिण अमेरिका के समुद्र में होती है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. भारत में गर्मी और मानसून पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलता है.
एल नीन्यो की पूरी कहानी
सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा यानी दक्षिण अमेरिका के पास का समुद्री पानी ठंडा रहता है. वहीं पश्चिमी हिस्सा, जो एशिया और ऑस्ट्रेलिया के करीब है, वहां का पानी ज्यादा गर्म होता है.
समुद्र के ऊपर चलने वाली तेज हवाएं, जिन्हें ट्रेड विंड्स कहा जाता है, गर्म पानी को एशिया की दिशा में धकेलती रहती हैं. इसी वजह से इंडोनेशिया, फिलीपींस और आसपास के इलाकों में ज्यादा नमी और बारिश होती है.
लेकिन हर 2 से 7 साल में एक बार ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. जब ऐसा होता है, तो गर्म पानी वापस पूर्वी दिशा यानी दक्षिण अमेरिका की ओर फैलने लगता है. इसके कारण प्रशांत महासागर का बड़ा हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. यही स्थिति एल नीन्यो कहलाती है.
भारत में क्यों बढ़ जाती है गर्मी?
भारत का मानसून मुख्य रूप से हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाओं पर निर्भर करता है. लेकिन एल नीन्यो बनने पर हवा का वैश्विक पैटर्न बदल जाता है.
जब प्रशांत महासागर में ज्यादा गर्मी पैदा होती है, तो बादल और बारिश का बड़ा हिस्सा दक्षिण अमेरिका और मध्य प्रशांत क्षेत्र में केंद्रित हो जाता है. इसका असर यह होता है कि भारत की ओर आने वाली नमी कमजोर पड़ जाती है.
परिणामस्वरूप मानसून कमजोर हो सकता है, बारिश कम हो सकती है और लंबे समय तक सूखी और गर्म परिस्थितियां बनी रह सकती हैं. अप्रैल, मई और जून के महीनों में आसमान ज्यादा साफ रहने से सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान तेजी से बढ़ता है.
दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में हीटवेव की स्थिति गंभीर हो सकती है.
2023 में भी दिखा था असर
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 में भी मजबूत एल नीन्यो के कारण भारत ने भीषण गर्मी का सामना किया था. कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था.
उस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहा और कई इलाकों में बारिश की कमी देखने को मिली. गर्मी लंबे समय तक बनी रही, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
अब चिंता इस बात की है कि इस बार स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है.
क्या होता है सुपर एल नीन्यो?
जब प्रशांत महासागर के मध्य हिस्से का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो उसे ‘सुपर एल नीन्यो’ कहा जाता है.
फिलहाल वैज्ञानिकों के अनुसार मध्य प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही सामान्य से करीब 0.9 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच चुका है. समुद्र की सतह के नीचे भी बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है, जो लगातार ऊपर आ रहा है.
अगर यही स्थिति अगले कुछ महीनों तक बनी रहती है, तो यह सुपर एल नीन्यो में बदल सकती है. ऐसा बहुत कम बार हुआ है. 1982, 1997 और 2015 में दुनिया ने सुपर एल नीन्यो का असर देखा था. उन वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं देखने को मिली थीं.
ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ा रही खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार खतरा इसलिए ज्यादा बड़ा है क्योंकि पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से गर्म हो चुकी है.
धरती और महासागरों का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में अगर सुपर एल नीन्यो सक्रिय होता है, तो इसका असर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
कुछ वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह पिछले 150 सालों में सबसे मजबूत एल नीन्यो साबित हो सकता है.
भारत पर क्या हो सकता है असर?
अगर सुपर एल नीन्यो पूरी तरह विकसित होता है, तो भारत में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
आने वाले महीनों में मौसम का हर अपडेट बेहद महत्वपूर्ण होगा. अगर समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ता रहा, तो इस साल गर्मी लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
यानी इस बार केवल सामान्य एल नीन्यो नहीं, बल्कि ‘सुपर एल नीन्यो’ का खतरा मंडरा रहा है, जो धरती को सचमुच भट्टी की तरह तपाने की क्षमता रखता है.
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