कौन था ‘डॉक्टर’ हमजा बुरहान? पुलवामा साजिश से अल-बद्र तक... आतंक की पूरी कहानी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में हुई एक रहस्यमय हत्या ने एक बार फिर कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान समर्थित संगठनों की गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है. अज्ञात हमलावरों द्वारा मारा गया हमजा बुरहान उर्फ अर्जुमंद गुलजार डार लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था.

Pulwama Attack Mastermind hamza burhan Killed in POK
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में हुई एक रहस्यमय हत्या ने एक बार फिर कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और पाकिस्तान समर्थित संगठनों की गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है. अज्ञात हमलावरों द्वारा मारा गया हमजा बुरहान उर्फ अर्जुमंद गुलजार डार लंबे समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था. उसे सिर्फ एक आतंकी नहीं, बल्कि घाटी में कट्टरपंथ और भर्ती तंत्र का बड़ा चेहरा माना जाता था. पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में उसका नाम सामने आने के बाद वह सुरक्षा एजेंसियों की सूची में सबसे खतरनाक आतंकियों में शामिल हो गया था.

पाकिस्तान में बना आतंकी चेहरा

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के खरबतपोरा रत्नीपोरा का रहने वाला अर्जुमंद गुलजार डार शुरुआत में एक सामान्य युवक की तरह दिखाई देता था. लेकिन 2017 में उच्च शिक्षा के नाम पर पाकिस्तान जाने के बाद उसकी जिंदगी ने पूरी तरह अलग दिशा पकड़ ली. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान पहुंचने के कुछ समय बाद ही वह आतंकी संगठनों के संपर्क में आ गया और धीरे-धीरे कट्टरपंथी नेटवर्क का हिस्सा बन गया.

बताया जाता है कि पाकिस्तान में उसे वैचारिक और सैन्य प्रशिक्षण दोनों दिए गए. इसके बाद उसने घाटी में युवाओं को भड़काने और आतंकवादी संगठनों में भर्ती कराने का काम शुरू किया. सोशल मीडिया और गुप्त नेटवर्क के जरिए वह युवाओं को ‘जिहाद’, ‘शहादत’ और धार्मिक भावनाओं के नाम पर बरगलाता था. एजेंसियों का दावा है कि कई किशोर उसके प्रभाव में आकर आतंक के रास्ते पर चले गए.

भारत सरकार ने 2022 में घोषित किया था आतंकवादी

हमजा बुरहान की बढ़ती गतिविधियों और आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका को देखते हुए भारत सरकार ने 2022 में उसे गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया था. उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने, हथियारों की सप्लाई, भर्ती और हमलों की योजना बनाने जैसे गंभीर आरोप थे.

भारतीय एजेंसियों के मुताबिक वह लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर घाटी में आतंक का नेटवर्क चला रहा था. उसके संपर्क कई सक्रिय आतंकियों और सीमा पार बैठे हैंडलर्स से जुड़े हुए थे. इसी वजह से वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता था.

अल-बद्र से जुड़ाव और आतंक का विस्तार

हमजा बुरहान अल-बद्र आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था और खुद को संगठन का ‘डिविजनल कमांडर’ बताता था. अल-बद्र उन पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों में शामिल है, जो जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. भारतीय एजेंसियों का मानना है कि यह संगठन सिर्फ आतंक फैलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का संगठित अभियान भी चला रहा था.

हमजा ने दक्षिण कश्मीर में अपने नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया. उसके जरिए कई स्थानीय युवाओं को हथियार नेटवर्क और आतंकी मॉड्यूल से जोड़ा गया. हालांकि खुद वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सुरक्षित माहौल में रह रहा था, लेकिन घाटी के युवाओं को हिंसा की आग में झोंकने का काम करता रहा.

‘लोन वुल्फ वॉरियर्स’ नाम से बनाया नया नेटवर्क

साल 2021 में अल-बद्र से मतभेद बढ़ने के बाद हमजा बुरहान ने अपना अलग नेटवर्क तैयार किया, जिसे ‘लोन वुल्फ वॉरियर्स’ कहा गया. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह संगठन छोटे लेकिन बेहद खतरनाक मॉड्यूल तैयार करता था, जिनका मकसद घाटी में डर का माहौल बनाना था.

इस नेटवर्क पर गैर-स्थानीय मजदूरों, आम नागरिकों और कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने की साजिश रचने के आरोप लगे. एजेंसियों के अनुसार, हमजा इस संगठन के जरिए ऐसे युवाओं की भर्ती करता था जो अकेले हमला कर सकें और सुरक्षा एजेंसियों के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो.

क्या है अल-बद्र आतंकी संगठन?

अल-बद्र का गठन 1998 में हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान में मिलाना बताया जाता है. भारत सरकार ने 2002 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था. संगठन का मुख्यालय पाकिस्तान के मनसेहरा इलाके में माना जाता है, जबकि इसका कैंप ऑफिस मुजफ्फराबाद में होने की बात सामने आती रही है.

सुरक्षा रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके ट्रेनिंग कैंप खैबर पख्तूनख्वा, कोटली और PoK के कई इलाकों में सक्रिय रहे हैं. भारतीय एजेंसियां लगातार दावा करती रही हैं कि अल-बद्र को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और जमात-ए-इस्लामी का समर्थन मिलता रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे बड़े आतंकी संगठनों के लिए ‘फ्रंट नेटवर्क’ की तरह भी काम करता रहा है. यानी जब अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है तो बड़े संगठन अपने ऑपरेशन छोटे संगठनों के जरिए चलाने लगते हैं.

पुलवामा और घाटी में हमलों का आरोप

अल-बद्र का नाम जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ चुका है. 2018 में पुलवामा और शोपियां में हुए ग्रेनेड हमलों की जिम्मेदारी भी संगठन ने ली थी. इसके अलावा फिदायीन हमलों, हथियारों की तस्करी और आतंकी भर्ती में इसकी भूमिका लगातार सामने आती रही है.

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सुरक्षा बलों ने संगठन के कई आतंकियों को मार गिराया है. इसके बावजूद पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क लगातार नए मॉड्यूल खड़े करने की कोशिश करता रहा. ऐसे में हमजा बुरहान की हत्या को भी आतंकी संगठनों के भीतर चल रही आपसी दुश्मनी, सत्ता संघर्ष और रहस्यमय हत्याओं की श्रृंखला से जोड़कर देखा जा रहा है.

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