नई दिल्ली: देशभर में मई की गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. राजधानी दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत तक भीषण लू और तेज धूप ने हालात बेहद कठिन बना दिए हैं. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में भारत के कई शहर लगातार शामिल हो रहे हैं. बुधवार को दुनिया के 15 सबसे गर्म शहरों में से 9 शहर भारत के दर्ज किए गए, जिसने बढ़ती गर्मी की गंभीरता को साफ दिखा दिया.
उत्तर प्रदेश का बांदा 48 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म शहर रहा. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में तापमान 50 डिग्री के करीब पहुंच सकता है. लगातार चल रही गर्म हवाओं, साफ आसमान और तेज धूप के कारण लोगों को दिन में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है.
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी परेशानी
दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. बुधवार को राजधानी में इस सीजन की सबसे गर्म सुबह दर्ज की गई. लगातार तीसरे दिन कई इलाकों में लू जैसी स्थिति बनी रही.
मौसम विभाग ने 26 मई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इसका मतलब है कि अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है. दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि कुछ इलाकों में यह 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं, लगातार धूप और बादलों की कमी के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है. मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है.
अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज
भीषण गर्मी का असर लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर, थकान और त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक तेज धूप में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
बिजली की मांग ने तोड़ा रिकॉर्ड
झुलसाने वाली गर्मी के बीच बिजली की खपत भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. दिल्ली में बुधवार को बिजली की मांग बढ़कर 8,039 मेगावॉट तक पहुंच गई, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
बिजली वितरण कंपनियों के अनुसार मई के शुरुआती 20 दिनों में बिजली की मांग पिछले साल की तुलना में 65 से 75 प्रतिशत तक ज्यादा दर्ज की गई है. लगातार एसी, कूलर और पंखों के इस्तेमाल के कारण बिजली पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है.
गिग वर्कर्स पर दोहरी मार
भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो पूरे दिन सड़कों पर काम करते हैं. खासतौर पर डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर और अन्य गिग वर्कर्स को तेज धूप में लंबे समय तक काम करना पड़ रहा है.
आईआईटी दिल्ली की एक स्टडी में सामने आया है कि करीब 56 प्रतिशत गिग वर्कर्स रोजाना 12 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं. तपती सड़कों पर घंटों बिताने के कारण उन्हें सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, हीट रैश और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों में काम करना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर (TRIP) की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि गिग वर्कर्स को आधिकारिक तौर पर “आउटडोर वर्कर्स” की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनके लिए काम के घंटे, सुरक्षा और गर्मी से बचाव को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जा सकें.
जल संकट की भी बढ़ी चिंता
गर्मी के साथ-साथ देश में जल संकट की आशंका भी बढ़ती जा रही है. सेंट्रल ग्राउंड कमिशन की रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन जलाशयों में इस समय कुल जल भंडारण क्षमता का केवल 34.45 प्रतिशत पानी बचा है. हालांकि अभी उपलब्ध पानी सामान्य स्तर से कुछ अधिक बताया गया है, लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी और पानी की खपत चिंता का कारण बन रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मानसून कमजोर रहा या बारिश सामान्य से कम हुई, तो आने वाले महीनों में पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन पर भारी दबाव पड़ सकता है.
अल नीनो और बढ़ती गर्मी का असर
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल अल नीनो का असर भी गर्मी को और खतरनाक बना सकता है. प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान का असर भारतीय मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश कम हो सकती है और गर्मी लंबी खिंच सकती है.
अगर मानसून कमजोर रहा, तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत के इलाकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
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