संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने नजर आए. इस बार मुद्दा था आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और अफगानिस्तान में नागरिकों पर हुए हमले. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिस देश का इतिहास अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा, दमन और आतंक से जुड़ा रहा है, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सीमा पार आतंकवाद आज भी क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
भारत का यह बयान उस समय आया, जब संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा चल रही थी. भारत ने इस दौरान United Nations Assistance Mission in Afghanistan की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए.
अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत का मुद्दा उठाया
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार सैन्य कार्रवाई और एयरस्ट्राइक के कारण अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए. भारत के मुताबिक, UNAMA की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान 750 नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाएं सामने आईं.
भारत ने दावा किया कि रिपोर्ट में दर्ज 95 घटनाओं में से 94 के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार पाए गए. भारत ने कहा कि यह केवल सैन्य कार्रवाई का मामला नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों का भी गंभीर मुद्दा है.
संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने यह भी कहा कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाते हैं और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को कमजोर करते हैं.
रमजान के दौरान एयरस्ट्राइक का भी जिक्र
भारत ने अपने बयान में मार्च 2026 में काबुल स्थित ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हुए कथित एयरस्ट्राइक का मुद्दा भी उठाया. भारत ने कहा कि यह हमला रमजान के दौरान तरावीह की नमाज के बाद हुआ था, जब लोग मस्जिद से बाहर निकल रहे थे.
भारत के अनुसार, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई जबकि 122 लोग घायल हुए. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सवाल उठाया कि आखिर आम नागरिकों और धार्मिक स्थलों के आसपास सैन्य कार्रवाई को कैसे उचित ठहराया जा सकता है.
भारत ने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता.
1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी उल्लेख
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के इतिहास का जिक्र करते हुए 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट की भी चर्चा की. भारत ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड अपने ही लोगों के खिलाफ हिंसा और दमन से भरा रहा है.
भारत ने आरोप लगाया कि 1971 में पाकिस्तान ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की और लाखों लोगों को प्रभावित किया. भारत ने यह भी कहा कि उस दौर में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं सामने आई थीं.
भारत का कहना था कि जो देश अपने इतिहास से सबक नहीं लेता और लगातार हिंसा तथा कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है, वह दूसरे देशों को मानवाधिकार और लोकतंत्र का पाठ नहीं पढ़ा सकता.
“आतंकवाद को समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराना होगा”
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है और इसे समर्थन देने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि जो देश आतंकवादियों को पनाह, फंडिंग या राजनीतिक समर्थन देते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह बनाया जाए.
भारत ने दो टूक कहा कि किसी भी विचारधारा, धर्म या राजनीतिक कारण के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाना कभी सही नहीं ठहराया जा सकता.
पाकिस्तान पर ‘प्रचार राजनीति’ का आरोप
भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर अपनी आंतरिक समस्याओं और विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए भारत विरोधी बयानबाजी और प्रचार का सहारा लेता है.
भारत के अनुसार, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है कि आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड खत्म किए जाएं और सभी देशों के लिए एक समान नीति अपनाई जाए.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के इस कड़े रुख को पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है. भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि आतंकवाद और सीमा पार हिंसा के मुद्दे पर वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को लगातार घेरता रहेगा.
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