Iran Russia Cruise Missile: ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के दम पर अमेरिका के साथ करीब 6 महीने से चल रहे युद्ध में जिस तरह मुकाबला किया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी सैन्य ताकत की ओर खींचा है. ईरान ने दिखाया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम काफी मजबूत है.
अब खबर है कि तेहरान एक ऐसी नई ताकत हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका और इजरायल दोनों की चिंता बढ़ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को भारत की ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक हासिल करने में मदद कर रहा है.
ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में मदद
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस एक गुप्त कार्यक्रम के तहत ईरान को आधुनिक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में मदद कर रहा है. इस कार्यक्रम को C430L नाम दिया गया है. जानकारों के मुताबिक, यह रूस की ओर से ईरान को दी जा रही सबसे अहम सैन्य तकनीकों में से एक हो सकती है.
ब्रह्मोस भी एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर विकसित किया है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट लीक हुए रूसी पत्राचार और सैन्य पेटेंट के अध्ययन पर आधारित है. रिपोर्ट में कहा गया है कि C430L कार्यक्रम की शुरुआत 2023 में हुई थी. यानी यह अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष से काफी पहले शुरू हो चुका था और हालिया युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा.
रैमजेट इंजन की तकनीक हासिल कर रहा ईरान
रिपोर्ट के अनुसार, C430L प्रोजेक्ट का मकसद ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बनाने में मदद करना है. यह ऐसी इंजन तकनीक है, जो क्रूज मिसाइल को तेज रफ्तार से उड़ने में मदद करती है. मिसाइल विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल जमीन और समुद्र दोनों जगहों को निशाना बनाने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है.
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ फैबियन हिंज ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि यह रूस की ओर से बेहद संवेदनशील सैन्य तकनीक का बड़ा ट्रांसफर है. उनके मुताबिक, ईरान लंबे समय से इस तरह की तकनीक हासिल करना चाहता था. उन्होंने यह भी कहा कि रूस में ऐसे प्रोजेक्ट के लिए काफी ऊपरी स्तर पर मंजूरी की जरूरत होती है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम तैयार कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी किया जा चुका है. हालांकि, रूस की मदद से बनी किसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने तैनात किया है, इसका अब तक कोई सबूत नहीं मिला है.
अमेरिका और इजरायल की बढ़ सकती है चिंता
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता होती है. इस वजह से एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ऐसी मिसाइलों का पता लगाना और उन्हें रोकना मुश्किल हो सकता है.
ईरान के लिए खाड़ी क्षेत्र में यह तकनीक काफी अहम हो सकती है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के पास जमीन और समुद्र से मिसाइल हमलों को रोकने के लिए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं. ऐसे में ईरान की मिसाइल क्षमता में इस तरह का इजाफा अमेरिका और इजरायल के लिए नई चुनौती बन सकता है.
रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी प्रोजेक्ट में शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी इस कार्यक्रम में शामिल थी और उसने इसकी व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई. रूस की रॉकेट डिजाइन कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा थी.
लीक हुए यात्रा रिकॉर्ड के मुताबिक, नवंबर 2023 में तेहरान के साथ C430L प्रोजेक्ट पर औपचारिक समझौता होने से पहले रूसी हथियार निर्यात अधिकारियों और एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के वरिष्ठ इंजीनियरों ने कई बार ईरान की यात्रा की थी.
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया के पास रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम से जुड़ी बड़ी मात्रा में ईरानी तकनीकी जानकारी पहुंच चुकी थी. रूसी इंजीनियरों ने ईरान में हुए उड़ान परीक्षण के आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद सिस्टम की क्षमता को लेकर सवालों की एक सूची भी तेहरान को भेजी थी. लीक हुई बातचीत के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध शुरू होने के बाद भी यह प्रोग्राम 2026 तक जारी रहा.
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