US Failed Operation Eagle Claw: ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य हस्तक्षेप की खुली चेतावनी के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं. छात्रों और व्यापारियों के प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की फायरिंग ने आग में घी का काम किया है.
इस घटना के बाद ईरान का नेतृत्व अंदरूनी दबाव और बाहरी धमकियों, दोनों से घिरता नजर आ रहा है. ट्रंप के सख्त बयान के जवाब में अब ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है और 1980 के उस नाकाम अमेरिकी रेस्क्यू मिशन की याद दिला दी है, जिसे आज भी वॉशिंगटन के लिए शर्मनाक अध्याय माना जाता है.
Iranians know US “rescue” record well, from Iraq and Afghanistan to Gaza. Any intervening hand-nearing #Iran_Security on pretexts will be cut off with a#Regret_Inducing_Response. Iran’s national security is a #Red_Line, notmaterial for adventurist tweets.
— علی شمخانی (@alishamkhani_ir) January 2, 2026
सुरक्षा बलों की गोलीबारी के बाद बढ़ा संकट
ईरान में महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों और व्यापारियों पर जब सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं, तो हालात तेजी से बिगड़ गए. इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन और उग्र हो गए हैं. माना जा रहा है कि इसी घटनाक्रम ने अमेरिका को फिर से ईरान पर सख्त बयान देने का मौका दे दिया है. ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में बेचैनी साफ दिख रही है.
ईरान के सुरक्षा प्रमुख का पलटवार
ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी ने अमेरिका और इजराइल दोनों को चेतावनी देते हुए बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि हालिया बयानों से पर्दे के पीछे की साजिशें अब साफ हो चुकी हैं. लारीजानी के मुताबिक, ईरानी प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध कर रहे दुकानदारों और हिंसा फैलाने वाले तत्वों के बीच फर्क करना जानता है.
उन्होंने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि ईरान के आंतरिक मामलों में दखल पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और इससे खुद अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचेगा. साथ ही उन्होंने अमेरिकी जनता को भी संदेश दिया कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी ट्रंप की होगी और उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए.
सुप्रीम लीडर के सलाहकार का तीखा तंज
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली शमखानी ने भी सोशल मीडिया के जरिए ट्रंप की चेतावनी पर जवाब दिया. उन्होंने अमेरिका के पुराने सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान, अमेरिका के “रेस्क्यू रिकॉर्ड” से भली-भांति परिचित है, चाहे वह इराक हो, अफगानिस्तान हो या फिर गाजा.
शमखानी ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एक “रेड लाइन” है और इसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा. यह बयान सीधे तौर पर चेतावनी के साथ-साथ अमेरिका के अतीत की नाकामियों पर तंज भी माना जा रहा है.
क्या था अमेरिका का बदनाम ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’?
ईरानी नेताओं की टिप्पणियों में जिस पुराने मिशन का जिक्र बार-बार हो रहा है, वह है अमेरिका का ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’. अप्रैल 1980 में शुरू किया गया यह मिशन अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े सैन्य फेलियर में गिना जाता है.
इसकी पृष्ठभूमि 4 नवंबर 1979 की है, जब ईरान की इस्लामिक क्रांति के दौरान तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया गया था और 52 अमेरिकी राजनयिकों व नागरिकों को बंधक बना लिया गया था. उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति जिमी कार्टर के सामने कूटनीति और सैन्य कार्रवाई, दो विकल्प थे. कूटनीतिक कोशिशें नाकाम होने के बाद कार्टर ने एक गुप्त बचाव अभियान को मंजूरी दी.
रेगिस्तान में कैसे बिखर गया अमेरिकी प्लान
‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ के तहत अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत से हेलीकॉप्टर और C-130 विमान ईरान के रेगिस्तान में उतरे थे. योजना थी कि ‘डेजर्ट वन’ नामक गुप्त ठिकाने पर सभी इकाइयां मिलेंगी और फिर बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा.
लेकिन मिशन की शुरुआत से ही मुश्किलें आने लगीं. कुछ हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी का शिकार हो गए, वहीं ईरान के रेगिस्तान में आई भीषण धूल भरी आंधी ने हालात और खराब कर दिए. आखिरकार मिशन रद्द करने का फैसला लिया गया.
टक्कर, विस्फोट और आठ सैनिकों की मौत
मिशन रद्द होने के बाद पीछे हटते वक्त एक हेलीकॉप्टर की टक्कर C-130 विमान से हो गई. जोरदार विस्फोट हुआ और आठ अमेरिकी सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई. कई अन्य घायल हुए और मिशन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ.
दुनिया के सामने अमेरिका की बेइज्जती
इस हादसे के बाद जले हुए हेलीकॉप्टर और विमान का मलबा ईरानी सुरक्षा बलों के हाथ लगा. ईरान ने इसे राष्ट्रीय टीवी पर दिखाया, जिससे अमेरिका को वैश्विक स्तर पर भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी. आज चार दशक बाद भी जब ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ता है, तो तेहरान के नेता इसी नाकाम रेस्क्यू मिशन की याद दिलाकर वॉशिंगटन को चेतावनी देने से नहीं चूकते.
ये भी पढ़ें- सुट्टा मारने वालों के लिए बुरी खबर, 1 फरवरी से इतनी महंगी हो जाएगी सिगरेट, जानें 20 वाली कितने में मिलेगी