किसी के आगे नहीं झुकता....ईरान ने ट्रंप को दी खुली चेतावनी, क्या फिर छिड़ेगा युद्ध?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के खिलाफ सख्त लहजे में बयान देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देश किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को नकारे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ईरान हर पाबंदी का तोड़ ढूंढ लेगा.

Iran President challenged trump over arrogance says attack nuclear base
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के खिलाफ सख्त लहजे में बयान देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि देश किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को नकारे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ईरान हर पाबंदी का तोड़ ढूंढ लेगा.


राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संबोधन में 'स्नैपबैक मैकेनिज्म' की आलोचना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था रोकने की कोशिश जरूर करती है, लेकिन मानव विवेक और संकल्प ऐसे रास्ते बनाता है, जो किसी भी अड़चन को पार कर जाते हैं.

"हमारे ठिकानों को निशाना बनाया, पर हौसला नहीं तोड़ पाए"

अपने भाषण में उन्होंने उन हमलों की भी चर्चा की, जिनमें ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्र नातांज और फोर्डो को निशाना बनाया गया था. इन हमलों का आरोप अमेरिका और इज़रायल पर लगाया जाता है. राष्ट्रपति ने कहा वे हमारे परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुँचा सकते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि हम उन ठिकानों को दोबारा खड़ा करने की काबिलियत रखते हैं.

पश्चिमी देशों से तकरार तेज

गौरतलब है कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने हाल ही में ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये देश 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के तहत ईरान पर स्नैपबैक पाबंदियों की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि ईरान ने उस समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया, जिसका उद्देश्य उसकी परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण रखना था.

ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि हम न किसी की अत्यधिक मांगें स्वीकार करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे. हमारे पास हालात को पलटने की पूरी ताकत है.उनका यह बयान संकेत देता है कि ईरान पश्चिमी दबावों के बावजूद अपने निर्णयों और राष्ट्रीय स्वाभिमान से समझौता करने को तैयार नहीं है.

परमाणु समझौता और 'स्नैपबैक' क्या है?

JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) 2015 में ईरान और 6 वैश्विक ताकतों के बीच हुआ था. इस समझौते के तहत ईरान ने परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत पाने का वादा किया था. लेकिन यदि ईरान किसी शर्त का उल्लंघन करता है, तो कोई भी हस्ताक्षरकर्ता देश "स्नैपबैक" प्रक्रिया के तहत पुराने प्रतिबंधों को फिर से लागू कर सकता है.

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