तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने दावा किया है कि उसने 'आंख के बदले आंख' (Eye for an Eye) नाम से सैन्य अभियान शुरू किया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस अभियान के तहत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया.
ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल में हुए अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई है. हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इन हमलों से किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
क्या है 'आंख के बदले आंख' ऑपरेशन?
ईरान ने अपने इस अभियान का नाम 'आंख के बदले आंख' रखा है. इसका मतलब है कि अगर ईरान पर हमला होगा, तो वह भी उसी तरह जवाब देगा.
ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि उसकी सुरक्षा या सैन्य ठिकानों पर हमला होने पर वह जवाबी कार्रवाई करेगा. इसी नीति के तहत उसने इस नए ऑपरेशन का दावा किया है.
अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अनुसार, अभियान के दौरान जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.
दावे के मुताबिक, पहले चरण में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए.
इसके बाद बहरीन के शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाया गया. ईरान का दावा है कि यहां हेलीकॉप्टर और ड्रोन से जुड़ी सैन्य सुविधाओं पर हमला हुआ.
तीसरे चरण में कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर भी हमले किए जाने का दावा किया गया है.
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.
अमेरिका ने क्या कहा?
अब तक अमेरिका की ओर से इन हमलों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. न ही किसी सैन्य ठिकाने पर नुकसान या हताहत होने की पुष्टि की गई है.
ऐसे मामलों में शुरुआती दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर हो सकता है. इसलिए आगे आने वाली आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.
क्यों बढ़ी दुनिया की चिंता?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है.
खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्ति केंद्रों में शामिल है. यहां तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ सकता है.
भारत समेत कई देश अपनी तेल जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं. ऐसे में हालात बिगड़ने का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
पहले भी कर चुका है जवाबी हमला
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई का दावा किया है.
साल 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे.
इसके अलावा 2024 में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर हमले के बाद ईरान ने पहली बार सीधे अपनी जमीन से इजराइल पर ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं.
इसी वजह से माना जाता है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीति में जवाबी कार्रवाई को अहम रणनीति मानता है.
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