ईरान युद्ध का विनाशकारी असर, 24 दिन में 2604 लोगों की मौत, किस देश में कितने लोगों ने गंवाई जान?

Middile East Crisis: मध्य-पूर्व में अमेरिकी और इजराइल के द्वारा ईरान पर हमलों के बाद से स्थिति हर गुजरते दिन के साथ और भी बिगड़ती जा रही है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब 24 दिनों के बाद कई देशों में युद्ध जैसे हालात बना चुका है.

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Middile East Crisis: मध्य-पूर्व में अमेरिकी और इजराइल के द्वारा ईरान पर हमलों के बाद से स्थिति हर गुजरते दिन के साथ और भी बिगड़ती जा रही है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब 24 दिनों के बाद कई देशों में युद्ध जैसे हालात बना चुका है. धमाके और हमले लगातार जारी हैं, और इस बीच सैकड़ों निर्दोष लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. 

ईरान में भारी तबाही

ईरान में हुए इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर हुआ है, जहां अब तक करीब 1500 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. घायलों की संख्या 18,551 तक पहुंच चुकी है, जिनमें 200 महिलाएं और 168 बच्चे शामिल हैं. इनमें से कई बच्चे मिनाब के एक गर्ल्स स्कूल में पढ़ने वाले थे. इसके अलावा, 11 स्वास्थ्यकर्मी भी इस संघर्ष की भेंट चढ़ चुके हैं. युद्ध के दौरान हुए ये हमले ईरान के नागरिकों के लिए बुरी तरह से भयावह साबित हो रहे हैं.

इजराइल और अमेरिका पर भी हमलों का असर

इजराइल पर हुए हमलों में 18 लोग मारे गए हैं और 3,730 से अधिक घायल हुए हैं. 1 मार्च को बेइत शेमेश में हुए मिसाइल हमले में 9 लोगों की जान गई थी. इजराइल के नागरिकों को बंकरों में भी हमला होने के दौरान गंभीर चोटें आईं. अमेरिकी सेना के 13 जवान भी इस संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 200 से ज्यादा घायल हो गए हैं. एक अमेरिकी सैनिक की कुवैत में बीमारी से मौत हो गई, और 13 मार्च को इराक में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 6 क्रू मेंबर्स की जान चली गई.

27 अमेरिकी ठिकानों पर हमला

ईरान ने अमेरिकी और इजराइल के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया. ईरान का दावा है कि उसने 27 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. इसके विपरीत, अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान में 7,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है. यह संघर्ष न केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित रहा, बल्कि कई देशों को इसकी चपेट में ला चुका है.

विभिन्न देशों में बढ़ती हताहतों की संख्या

इस युद्ध का असर सिर्फ ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं है. बहरीन में 2 लोगों की मौत हुई है, जबकि इराक में 61 लोगों की जान चली गई है, जिनमें ज्यादातर पीएमएफ के सदस्य थे. जॉर्डन में 28 लोग घायल हुए हैं, हालांकि वहां किसी की मौत नहीं हुई. कुवैत में 6 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं. ओमान में 3 लोगों की मौत हुई और 15 लोग घायल हो गए, जबकि कतर में 16 लोग घायल हुए हैं.

लेबनान में सबसे ज्यादा तबाही

मध्य-पूर्व में सबसे भयावह स्थिति लेबनान में बनी है. यहां अब तक 1001 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 2,584 लोग घायल हो गए हैं. बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, और देश में हालात पूरी तरह से काबू से बाहर होते जा रहे हैं. लेबनान के अलावा, अन्य देशों जैसे ओमान, कतर, और कुवैत में भी संघर्ष का असर साफ तौर पर महसूस हो रहा है.

तेल और गैस की कीमतों में उछाल

इस युद्ध का एक और बड़ा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ा है. इजराइल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद, तेल और गैस की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है. यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरे का संकेत है, क्योंकि यह युद्ध न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है.

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