Russian Oil India: जैसे ही पूरी दुनिया की नजर ईरान पर केंद्रित थी, उसी समय यूक्रेन ने बाल्टिक सागर में स्थित रूस के सबसे बड़े ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल प्रिमोर्स्क पर हमला किया. इस हमले के बाद वहां के फ्यूल स्टोरेज टैंक आग की लपटों में जल रहे हैं.
कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित निकाल लिया गया है और आग बुझाने का कार्य जारी है. लेकिन चिंता की बात यह है कि इसी पोर्ट से रूस से भारत को भी तेल की सप्लाई होती है, इसलिए इस हमले का वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की संभावना है.
हमले का तरीका और असर
मास्को टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन ने रविवार की रात 249 ड्रोन दागे. लेनिनग्राद के आसमान में 70 से अधिक ड्रोन को मार गिराया गया, लेकिन कुछ ड्रोन बाल्टिक सागर में प्रिमोर्स्क पोर्ट पर जाकर गिर गए.
प्रिमोर्स्क टर्मिनल प्रतिदिन 15 लाख बैरल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स प्रोसेस करता है और यह बाल्टिक पाइपलाइन सिस्टम का अंतिम बिंदु है. यही वह जगह है जहां से रूस के यूराल्स क्रूड के अधिकांश हिस्से की सप्लाई होती है. हमले के बाद प्रिमोर्स्क और पास के उस्त-लुगा बंदरगाह दोनों बंद कर दिए गए हैं, जिससे तेल निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है.
भारत तक तेल कैसे पहुंचता है
विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस के बाल्टिक पोर्ट से तेल जहाज के जरिए यूरोप या मेडिटेरेनियन होकर सुएज नहर के रास्ते लाल सागर और अरब सागर होते हुए भारत पहुंचता है. इस रूट पर तेल पहुँचने में टैंकर को लगभग 30 से 40 दिन लगते हैं. इसलिए प्रिमोर्स्क पर हुए हमले का असर सीधे तौर पर भारत तक तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है.
वैश्विक तेल संकट और बढ़ती चिंताएं
पहले से ही ईरान ने होर्मुज जलसंधि को बंद करने की धमकी दी है, जिससे रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है. अब इसमें प्रिमोर्स्क का टर्मिनल भी जोड़ दिया गया है. बाल्टिक सागर पर प्रतिदिन 1 से 1.5 मिलियन बैरल तेल का काम सस्पेंड हो गया है. इस तरह, दुनिया के दो सबसे बड़े तेल चोकपॉइंट एक ही समय पर खतरे में हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ने की संभावना है.
समय और रणनीति की भूमिका
इस हमले की टाइमिंग भी बहुत महत्वपूर्ण है. ईरान के बिजली प्लांट पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर इस अल्टीमेटम का पालन किया गया तो वह होर्मुज जलसंधि को स्थायी रूप से बंद कर देगा और क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा देगा.
सऊदी अरामको ने एशियाई खरीदारों से कहा है कि वे लाल सागर के एक बाईपास बंदरगाह के जरिए अप्रैल में आंशिक आपूर्ति के लिए तैयार रहें. इसी बीच रूस के बाल्टिक पोर्ट पर फ्यूल टैंक जल रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
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