Iran Cyber Hacker: दुनिया भर में साइबर हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी विदेश विभाग ने दो ईरानी नागरिकों, फतेमेह सेदिकियन काशी और मोहम्मद बाघेर शिरिनकर, की जानकारी देने पर दस मिलियन डॉलर का भारी इनाम घोषित किया है.
यह कदम दर्शाता है कि साइबर अपराध अब सिर्फ तकनीकी मसला नहीं रह गया, बल्कि देशों के बीच शक्ति संतुलन का अहम मुद्दा बन चुका है. अमेरिका का आरोप है कि ये दोनों ईरान की ओर से उसके महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे पर हमले कर रहे थे और कंप्यूटर फ्रॉड तथा दुरुपयोग कानून का उल्लंघन करते आए हैं.
कौन हैं फतेमेह और मोहम्मद?
इन दोनों के नाम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के राडार पर काफी समय से मौजूद हैं. अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि फतेमेह और मोहम्मद, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े ‘शाहिद शुश्तारी’ नामक साइबर ग्रुप के सक्रिय सदस्य हैं. इस ग्रुप पर पहले भी कई बार अमेरिका के महत्वपूर्ण सिस्टम को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं. माना जाता है कि यह संगठन अपने ऑपरेशनों को छिपाने के लिए अलग-अलग नामों से काम करता रहा है और गुप्त साइबर गतिविधियों के जरिए विभिन्न देशों के ढांचों में सेंध लगाता रहा है.
शाहिद शुश्तारी के ऑपरेशन कैसे काम करते हैं?
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार यह समूह सीधे ईरान के साइबर-इलेक्ट्रॉनिक कमांड के अधीन काम करता है. संगठन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साइबर हस्तक्षेप करना और डिजिटल निगरानी के जरिए खुफिया जानकारी इकट्ठा करना है. फतेमेह और मोहम्मद मिलकर साइबर हमलों की रणनीति तैयार करते हैं, डिजिटल हथियार विकसित करते हैं और अपने लक्ष्यों पर आभासी हमले चलाते हैं. कहा जाता है कि इनकी गतिविधियों ने ऊर्जा, शिपिंग, मीडिया, वित्त, दूरसंचार और पर्यटन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिससे कई कंपनियों और संस्थाओं को आर्थिक और परिचालन संबंधी नुकसान झेलना पड़ा.
अमेरिकी चुनावों में दखल का आरोप
अमेरिका ने इस साइबर समूह पर सबसे गंभीर आरोप 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप का लगाया है. अगस्त 2020 से यह टीम चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए एक संगठित साइबर अभियान चला रही थी. फर्जी पहचान, भ्रामक संदेशों और छुपे हुए डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल कर अमेरिकी मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें की गईं. इसी कारण 17 नवंबर 2021 को अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने शाहिद शुश्तारी और उसके छह सदस्यों पर आधिकारिक प्रतिबंध लगा दिए थे.
इनाम का उद्देश्य क्या है?
अमेरिका का मानना है कि इन दोनों साइबर विशेषज्ञों की गिरफ्तारी से ईरान के साइबर ऑपरेशनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिल सकती हैं. यह न केवल अमेरिका की सुरक्षा रणनीति को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक साइबर अपराधों की गुत्थियों को सुलझाने में भी मददगार साबित हो सकता है. इनाम की घोषणा इस बात का संकेत है कि डिजिटल खतरे अब पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों जितने ही गंभीर और व्यापक हो चुके हैं.
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