DRDO Fighter Jet Radar: भारत आधुनिक युद्ध के दौर में अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है. फाइटर जेट, मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और रडार जैसे रक्षा उपकरणों पर सरकार बड़े स्तर पर निवेश कर रही है. इसी दिशा में भारत ने लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सौदे के तहत डसॉल्ट राफेल फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दी है.
इसके अलावा रिपोर्ट्स के अनुसार भारत रूस से S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने पर भी विचार कर रहा है, ताकि देश की हवाई सुरक्षा और मजबूत की जा सके. सिर्फ वायु शक्ति ही नहीं, भारत समुद्री सुरक्षा को भी मजबूत कर रहा है. युद्धपोतों और अत्याधुनिक पनडुब्बियों पर बड़े स्तर पर खर्च किया जा रहा है. इसी कड़ी में जर्मनी के साथ करीब 80 हजार करोड़ रुपये का पनडुब्बी सौदा भी किया गया है.
एयर पावर पर खास फोकस
21वीं सदी में किसी भी देश की सैन्य ताकत का बड़ा पैमाना उसकी एयर फायर पावर को माना जाता है. अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों की वायु सेनाएं बेहद आधुनिक तकनीक से लैस हैं. भारत की भारतीय वायु सेना भी लगातार खुद को अपग्रेड कर रही है. इसी दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) एक नई और उन्नत तकनीक फोटोनिक रडार विकसित करने पर काम कर रहा है.
क्या है फोटोनिक रडार तकनीक
आज के अधिकांश फाइटर जेट में Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार लगे होते हैं, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल के जरिए लक्ष्य की पहचान करते हैं. लेकिन फोटोनिक रडार इससे एक कदम आगे की तकनीक है. इसमें पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के बजाय लेजर और ऑप्टिकल फाइबर के जरिए सिग्नल तैयार और प्रोसेस किए जाते हैं.
भारत ने हाल के वर्षों में गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक वाले AESA रडार के क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति की है. यह पुराने गैलियम आर्सेनाइड आधारित सिस्टम की तुलना में अधिक शक्ति और बेहतर तापमान प्रबंधन प्रदान करता है. हालांकि फोटोनिक रडार को सिर्फ हार्डवेयर अपग्रेड नहीं, बल्कि एक बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है.
भविष्य के फाइटर जेट में होगा इस्तेमाल
DRDO इस नई तकनीक को भारत के प्रस्तावित पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA Mk2) में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इस रडार की मदद से फाइटर जेट को अल्ट्रा-हाई डेफिनिशन इमेजिंग और बेहद सटीक ट्रैकिंग क्षमता मिलेगी.
पायलट को मिलेंगे कई बड़े फायदे
रिपोर्ट्स के मुताबिक फोटोनिक रडार की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुत ज्यादा बैंडविड्थ है, जो टेराहर्ट्ज रेंज तक पहुंच सकती है. इससे लक्ष्य की पहचान बेहद सटीक तरीके से की जा सकती है.
इस तकनीक से पायलट को कई फायदे मिल सकते हैं, जैसे:
धीरे-धीरे लागू होगी नई तकनीक
DRDO इस तकनीक को एकदम लागू करने के बजाय फेज्ड एडॉप्शन मॉडल के तहत विकसित कर रहा है. शुरुआती दौर में लंबी दूरी की निगरानी के लिए GaN आधारित AESA रडार का इस्तेमाल जारी रहेगा. इसके साथ छोटे और कॉम्पैक्ट फोटोनिक मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सटीक टारगेटिंग और इमेजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
योजना के मुताबिक इस तकनीक को पूरी तरह विकसित करके 2030 के दशक के मध्य तक AMCA Mk2 में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. गौरतलब है कि अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे कई देश भी इस तरह की ऑप्टिकल सेंसर तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत भी इस दौड़ में आगे रहने की कोशिश कर रहा है.
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