लोकसभा में गिरा विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, ध्वनिमत से हुआ खारिज, ओम बिरला ही रहेंगे स्पीकर

लोकसभा में विपक्ष की ओर से पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव, जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ था, ध्वनि मत से खारिज हो गया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपाती व्यवहार का आरोप लगाने का था.

no-confidence motion against Speaker Om Birla defeated in Lok Sabha
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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष की ओर से पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव, जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ था, ध्वनि मत से खारिज हो गया. इस प्रस्ताव का उद्देश्य स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपाती व्यवहार का आरोप लगाने का था. लेकिन दो दिनों तक चली लंबी बहस के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर का पुरजोर बचाव किया और विपक्ष पर तीखा हमला बोला. इसके बाद, प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया, जिससे ओम बिरला का अध्यक्ष पद बरकरार रहा.

इस अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन से प्रस्तुत किया था. विपक्षी सांसदों का आरोप था कि ओम बिरला ने अपनी भूमिका का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया और उनका पक्ष नहीं लिया. हालांकि, एनडीए नेताओं ने इस आरोप का कड़ा खंडन किया, और बताया कि स्पीकर ने हमेशा निष्पक्ष रूप से काम किया है. अब, अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ओम बिरला अपने पद पर बने रहेंगे.

"यह इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर कहा कि 'यह कोई आम बात नहीं है. करीब 4 दशक बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है. यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.' अमित शाह ने कहा कि आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है. इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया.' 

उन्होंने कहा कि ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है... और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है. लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है. लेकिन यहां उनपर शंका के सवाल उठा दिए.

"सदन आपसी विश्वास पर चलता है"

अमित शाह ने आगे कहा कि 'मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. सदन आपसी विश्वास से चलता है. पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं. इसलिए नियम बनाए गए हैं. यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है. जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो.'

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