Iran Attacks Amazon: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने बहरीन में स्थित अमेज़न के डेटा सेंटर पर ड्रोन हमले किए, जिससे अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के ऑपरेशंस प्रभावित हुए. इस हमले में डेटा सेंटर को सीधे निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन इसके आस-पास हुए हमले के कारण आग और पावर सप्लाई की व्यवस्था बाधित हो गई. यह हमला अमेरिकी टेक कंपनियों के खिलाफ ईरान की चेतावनी के बाद हुआ है, जिसमें उसने कहा था कि वह अमेरिकी कंपनियों के डेटा सेंटरों को निशाना बना सकता है.
ईरान की चेतावनी और हमला
ईरान ने पहले ही दुनिया की प्रमुख अमेरिकी टेक कंपनियों को चेतावनी दी थी कि वह उनके डेटा सेंटरों पर हमले कर सकता है. ईरानी मीडिया के अनुसार, बहरीन स्थित अमेज़न के डेटा सेंटर को अमेरिकी सैन्य और खुफिया गतिविधियों को सहयोग देने के कारण निशाना बनाया गया. इसके अलावा, ईरान ने मेटा, गूगल, एप्पल, और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के खिलाफ भी धमकी दी थी. इस हमले के बाद, डेटा सेंटर में आग लगने की सूचना मिली, और बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने इस पर कार्रवाई की जानकारी दी.
AWS के ऑपरेशंस पर असर
अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS), जो क्लाउड कंप्यूटिंग की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, के बहरीन क्षेत्र में ऑपरेशंस में खासी परेशानी आई. अमेज़न ने भी इस हमले के बाद सर्विस डिसरप्शन की पुष्टि की. ड्रोन हमले के कारण पावर सप्लाई प्रभावित हुई, स्ट्रक्चरल डैमेज हुआ और फायर सप्रेशन सिस्टम की पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई. इसके परिणामस्वरूप बैंकिंग, पेमेंट, डिलीवरी ऐप्स और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर सेवाएं बाधित हुईं. AWS, जो कि भारत समेत कई देशों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, में इस हमले से वैश्विक स्तर पर सेवा प्रभावित होने का खतरा था.
पहले भी हुआ था हमला
यह पहला हमला नहीं था, जब बहरीन स्थित AWS की सेवाओं को निशाना बनाया गया. इससे पहले, मार्च 2026 की शुरुआत में यूएई और बहरीन में ड्रोन हमले किए गए थे, जिनमें AWS के दो डेटा सेंटरों को सीधे प्रभावित किया गया था. इन हमलों के पीछे ईरान का दावा था कि ये डेटा सेंटर दुश्मन की सैन्य गतिविधियों में सहयोग कर रहे थे, और ईरान ने इन केंद्रों को अपने आक्रमण का लक्ष्य बनाना उचित समझा.
अमेरिका की धमकी और ईरान की रणनीति
यह हमला अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिकी कंपनियों या इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई हमला हुआ तो अमेरिका सैन्य और आर्थिक दोनों स्तर पर सख्त प्रतिक्रिया देगा. ईरान ने अब डेटा सेंटरों को एक नए युद्धक्षेत्र के रूप में देखना शुरू कर दिया है, क्योंकि ये क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं.
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