Middle East Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को टालने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गई है. ट्रंप ने कहा कि पिछले दो दिनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच शांति समझौते को लेकर रचनात्मक बातचीत हुई है. ट्रंप के अनुसार, इस सप्ताह के अंत तक एक समझौता होने की उम्मीद है, और तब तक अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा.
बातचीत की शर्तें और सैन्य कार्रवाई की स्थिति
ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि फिलहाल ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा संरचनाओं पर कोई हमला न किया जाए. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय बातचीत के परिणामों पर निर्भर करेगा. अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो भविष्य में सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी रह सकती है. ट्रंप के इस कदम ने मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन इस क्षेत्र में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य और तनाव
यह बातचीत उस समय हो रही है जब मिडल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है. ट्रंप ने पहले ईरान को चेतावनी दी थी कि वह 48 घंटे के भीतर इस समुद्री रास्ते को खोल दे, नहीं तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला कर सकता है. ईरान ने इसका कड़ा जवाब दिया था और कहा था कि अगर उसके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद कर देगा. यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
अमेरिका की ईरान के साथ बातचीत के लिए दूत नियुक्त
ईरान के साथ शांति समझौते की बातचीत के लिए ट्रंप ने अपने दो पुराने दूतों को नियुक्त किया है. स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर, जो ट्रंप के दामाद भी हैं, दोनों ईरान के साथ बातचीत करेंगे. उनकी कोशिश होगी कि वे ईरान से वह समझौते करवाएं, जिनसे अमेरिका के हितों की रक्षा हो सके.
अमेरिका की पांच मुख्य मांगों में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना, परमाणु हथियारों का निर्माण न करना, मिसाइल भंडारण पर नियंत्रण, और प्रॉक्सी संगठनों को फंडिंग रोकना शामिल हैं. वहीं, ईरान केवल परमाणु समझौते को लेकर ही बातचीत करना चाहता है और उसके विदेश मंत्री ने यह शर्त रखी है कि कोई भी समझौता तभी होगा, जब भविष्य में हमला न करने की गारंटी मिले.
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