सिंधु संधि पर बढ़ी पाकिस्तान की टेंशन, खौफ में शहबाज के मंत्री, बोले- पानी को हथियार बना रहा भारत

पाकिस्तान के मंत्री अहसान इकबाल ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भारत ऊपरी क्षेत्र में है और कई नदियां वहां से पाकिस्तान की ओर आती हैं.

Indus Waters Treaty Pakistan Minister Ahsan Iqbal say India Role In South Asia
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Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के मंत्री अहसान इकबाल ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भारत ऊपरी क्षेत्र में है और कई नदियां वहां से पाकिस्तान की ओर आती हैं. ऐसे में भारत पानी का इस्तेमाल पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत की भूमिका बहुत अहम है.

भारत पानी को हथियार बना सकता है

एक कार्यक्रम के दौरान अहसान इकबाल से भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के फैसले पर सवाल पूछा गया. इसके जवाब में पाकिस्तान के योजना और विकास मंत्री ने कहा कि उनके देश के सामने यह खतरा है कि भारत जरूरत के समय पानी रोक सकता है.

इकबाल ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया के बीचों-बीच स्थित है और बाकी देश उसके आसपास हैं. इसलिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो.

बाढ़ के लिए भारत पर लगाया था आरोप

अहसान इकबाल पहले भी सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर आरोप लगा चुके हैं. पिछले साल अगस्त में पंजाब में आई बाढ़ के लिए उन्होंने भारत को जिम्मेदार बताया था. उनका दावा था कि भारत ने रावी और सतलुज नदियों में पानी छोड़ा, जिससे पाकिस्तान के पंजाब और पीओके के कुछ इलाकों में बाढ़ आई.

क्या है सिंधु जल संधि?

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. यह संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी. इसके तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे.

संधि स्थगित होने के बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है. पाकिस्तान इसे मध्यस्थता अदालत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी ले जा चुका है. उसका प्रयास है कि भारत पर संधि बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाए. वहीं, भारत का रुख है कि मौजूदा परिस्थितियों में संधि को बहाल नहीं किया जाएगा.

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