भारत के 22 जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फंसे, लदा हुआ है क्रूड ऑयल और LPG, कैसे निकालेगी सरकार?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है.

Indian ships loaded with crude oil and LPG stranded in Strait of Hormuz
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है. खासकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण भारत के ऊर्जा सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है. ताजा जानकारी के अनुसार भारत आने वाले 22 जहाज इस इलाके के आसपास फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं.

22 भारतीय जहाज प्रभावित

सूत्रों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से के पास भारत से जुड़े 22 जहाज फंसे हुए हैं. इनमें से 4 जहाज कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं, जबकि 6 जहाजों में एलपीजी (LPG) लदी हुई है. इसके अलावा एक जहाज एलएनजी लेकर आ रहा है. युद्ध के कारण समुद्री यातायात प्रभावित होने से इन जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है.

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार इस संवेदनशील समुद्री मार्ग में तनाव के चलते जहाजों को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है.

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कई जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी. यह जलमार्ग ईरान के तट के पास स्थित है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है.

दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और समुद्री रास्ते से होने वाली एलएनजी आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है. इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकता है.

भारत की कूटनीतिक कोशिश

भारत सरकार ने फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार भारत पश्चिम एशिया के कई देशों के साथ लगातार संपर्क में है.

उन्होंने बताया कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना और समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है. इसके लिए खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के अलावा ईरान, अमेरिका और इजरायल से भी बातचीत की जा रही है.

भारत को मिली आंशिक राहत

इस बीच भारत को कुछ राहत भी मिली है. एक रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार रात एक भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहा.

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का विशाल गैस कैरियर ‘शिवालिक’ होर्मुज पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच गया. समुद्री ट्रैकिंग सेवा के अनुसार शनिवार तड़के इसकी लोकेशन ओमान की खाड़ी में दर्ज की गई.

इसके बाद शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का ही एक अन्य बड़ा गैस वाहक ‘नंदा देवी’ भी इस जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा. इन दोनों जहाजों में मिलाकर 92 हजार टन से ज्यादा एलपीजी लदी हुई है.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक ये जहाज 16 और 17 मार्च को गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंच सकते हैं.

ईरान की अनुमति से आगे बढ़े जहाज

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने कहा है कि तेहरान ने कुछ भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की अनुमति दी है. इससे भारत को कुछ राहत मिली है.

पश्चिम एशिया संकट को लेकर भारत बहुपक्षीय स्तर पर भी बातचीत कर रहा है. विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस मुद्दे पर ब्रिक्स देशों के बीच भी सहमति बनाने की कोशिश की है.

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