भारत की अर्थव्यवस्था पर नहीं होगा वैश्विक तनाव का असर, 6.5% की रफ्तार से दौड़ेगी GDP! महंगाई भी घटेगी

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ा दिया है.

Indian Economy GDP could grow at 6.5 percent Inflation will fall Goldman Sachs
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ा दिया है.

बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.1% से बढ़ाकर अब 6.5% कर दिया है. इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ सकती है.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में हालात सुधरने और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से भारत को बड़ा फायदा मिलेगा. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल सस्ता होना देश के लिए राहत की बात है.

भारत की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर आता है. ऐसे में वहां तनाव कम होना भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है.

महंगाई में भी कमी का अनुमान

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल और यूरिया जैसी जरूरी चीजों के दाम घटने से महंगाई भी कम हो सकती है. इसी वजह से भारत में खुदरा महंगाई (Inflation) का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया गया है.

कीमतें कम होने से सरकार का सब्सिडी खर्च भी घट सकता है, जिससे देश की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी.

मौसम से जुड़ी चुनौती

हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौसम की अनिश्चितता और गर्मी (हीटवेव) का असर ग्रामीण इलाकों की मांग पर पड़ सकता है. इससे खपत थोड़ी धीमी रह सकती है.

लेकिन उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में स्थिति सुधरेगी और मांग फिर से बढ़ेगी.

ब्याज दरों पर क्या असर होगा?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) 2026 में दो बार मिलाकर करीब 0.50% तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है.

लेकिन अगर महंगाई नियंत्रण में रहती है और कच्चे माल की कीमतें कम रहती हैं, तो RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी टाल भी सकता है.

कुल मिलाकर रिपोर्ट यह बताती है कि दुनिया में तनाव कम होने से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए माहौल बेहतर हुआ है और आने वाले समय में विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है.

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