EPFO Withdrawal Rules: क्या नौकरी के दौरान निकाल सकते हैं पूरा PF? जानिए 75% और 100% निकासी का नियम

EPF Withdrawal Rules: EPFO के नियमों के अनुसार, नौकरी के दौरान पूरा PF अमाउंट नहीं निकाला जा सकता है. पूरी रकम रिटायरमेंट पर या एक तय समय तक बेरोज़गार रहने के बाद ही निकाली जा सकती है. हालांकि, शिक्षा, इलाज, घर और शादी जैसी ज़रूरतों के लिए कुछ हिस्सा निकालने की इजाजत है.

EPFO Withdrawal Rules Can you withdraw your entire PF while still employed
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EPFO Alert: देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है. हर महीने कर्मचारी की सैलरी से एक हिस्सा EPF खाते में जमा होता है, जिसमें नियोक्ता भी अपना योगदान देता है. इस जमा राशि पर सरकार की ओर से तय ब्याज भी मिलता है, जिससे समय के साथ बड़ा फंड तैयार हो जाता है. हाल ही में EPFO की डिजिटल सेवाओं और EPFO 3.0 को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं. इसी बीच कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नौकरी के दौरान अपने PF खाते की पूरी रकम निकाली जा सकती है? आइए जानते हैं EPFO के मौजूदा नियम क्या कहते हैं.

कब निकाल सकते हैं EPF की 100 फीसदी राशि?

EPFO के नियमों के अनुसार, नौकरी करते समय कर्मचारी अपने PF खाते की पूरी राशि नहीं निकाल सकता. हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 100 प्रतिशत निकासी की अनुमति दी जाती है. सबसे पहला मामला रिटायरमेंट का है. जब कोई कर्मचारी 58 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तब वह अपने EPF खाते में जमा पूरी रकम निकाल सकता है. इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ने के बाद लंबे समय तक बेरोजगार रहता है, तब भी उसे पूरी राशि निकालने का अधिकार मिलता है.

बेरोजगारी की स्थिति में क्या है नियम?

अगर किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है और उसे तुरंत दूसरी नौकरी नहीं मिलती, तो EPFO चरणबद्ध तरीके से निकासी की सुविधा देता है. नौकरी छूटने के एक महीने बाद कर्मचारी अपने EPF बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकाल सकता है. यदि दो महीने या उससे अधिक समय तक नई नौकरी नहीं मिलती, तो शेष 25 प्रतिशत राशि भी निकाली जा सकती है. यह सुविधा कर्मचारियों को आर्थिक संकट के समय राहत देने के उद्देश्य से दी गई है.

नई नौकरी मिलने पर PF निकालना क्यों नहीं माना जाता सही?

अक्सर कर्मचारी नई नौकरी जॉइन करते समय पुराने PF खाते का पैसा निकाल लेते हैं, लेकिन EPFO ऐसा करने की सलाह नहीं देता. संगठन का कहना है कि कर्मचारी को अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से पुराने PF खाते को नए नियोक्ता से लिंक कराना चाहिए. इससे जमा राशि पर ब्याज मिलता रहता है, नौकरी की सेवा अवधि लगातार जुड़ी रहती है और रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है. बार-बार PF निकालने से भविष्य की बचत कम हो सकती है और कुछ परिस्थितियों में टैक्स का भुगतान भी करना पड़ सकता है.

किन जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं PF का पैसा?

हालांकि पूरी राशि निकालने की अनुमति नहीं होती, लेकिन EPFO कई जरूरी परिस्थितियों में आंशिक निकासी की सुविधा देता है. कर्मचारी उच्च शिक्षा, शादी, घर खरीदने, मकान निर्माण, होम लोन का भुगतान, गंभीर बीमारी के इलाज और अन्य निर्धारित जरूरतों के लिए PF खाते से तय सीमा तक राशि निकाल सकते हैं. प्रत्येक उद्देश्य के लिए अलग-अलग पात्रता और निकासी की सीमा निर्धारित की गई है.

पूरी निकासी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि EPF केवल एक बचत योजना नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार है. इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है, साथ ही हर साल ब्याज भी जुड़ता रहता है. यदि पैसों की तत्काल आवश्यकता नहीं है, तो PF की पूरी राशि निकालने के बजाय उसे खाते में ही रहने देना अधिक लाभदायक माना जाता है. इससे रिटायरमेंट के समय बड़ी राशि उपलब्ध होती है और भविष्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है.

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