सबसे बड़ी डिफेंस डील पर आज लगेगी मुहर, भारतीय वायुसेना को मिलेंगे 97 तेजस Mark-1A जेट, जानें ताकत

लंबे समय से चर्चा में रही तेजस Mark-1A लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर आज वह दिन है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) देश की सबसे बड़ी स्वदेशी डिफेंस डील पर औपचारिक मुहर लगाने जा रही है.

Indian Air Force to get 97 Tejas Mark-1A Fighter jets
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत के रक्षा क्षेत्र में आज का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है. लंबे समय से चर्चा में रही तेजस Mark-1A लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर आज वह दिन है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) देश की सबसे बड़ी स्वदेशी डिफेंस डील पर औपचारिक मुहर लगाने जा रही है. इस समझौते के तहत, वायुसेना को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से कुल 97 तेजस Mark-1A फाइटर जेट्स मिलेंगे, जिसकी अनुमानित लागत ₹66,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

यह कदम ना केवल वायुसेना की गिरती हुई स्क्वाड्रन संख्या को स्थिरता देने में मदद करेगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे द्विमुखी सैन्य खतरे से निपटने की क्षमता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा.

तेजस सौदे की अहमियत

तेजस फाइटर जेट, भारत में ही विकसित किया गया लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) है, जो अब धीरे-धीरे देश की वायु सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है. तेजस Mark-1A वर्जन में कई नए अपडेट शामिल हैं, जैसे:

  • Active Electronically Scanned Array (AESA) रडार
  • मल्टीरोल क्षमता
  • डिजिटल कॉकपिट और बेहतर एवियोनिक्स
  • सटीक हथियार प्रणाली, जिसमें एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें शामिल हैं
  • इन-फ्लाइट री-फ्यूलिंग क्षमता

इस डील से यह साफ संदेश जाता है कि भारत अब ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की ओर न केवल कदम बढ़ा रहा है, बल्कि उसे रणनीतिक सफलता में बदलने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है.

बढ़ती चुनौती के बीच निर्णायक फैसला

यह डील ऐसे समय पर हो रही है, जब भारत की वायुसेना पुराने मिग-21 जैसे फाइटर जेट्स को रिटायर कर रही है. मिग-21 की सेवाओं से बाहर होने के बाद IAF की स्क्वाड्रन ताकत 29 तक गिर सकती है, जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर होगा.

पाकिस्तान के पास फिलहाल 25 स्क्वाड्रन हैं और जल्द ही वह चीन से J-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स प्राप्त करने वाला है. दूसरी ओर, चीन की वायुसेना पहले से ही 4 गुना अधिक एयर पावर रखती है.

ऐसे में 97 तेजस Mark-1A विमानों की तैनाती भारत को हवा में फिर से मजबूत स्थिति में लाने में सहायक होगी. वायुसेना की आंतरिक समीक्षा रिपोर्टों में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि भविष्य में दोहरी मोर्चे की चुनौती (पाकिस्तान चीन) से निपटने के लिए कम से कम 42.5 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है.

तेजस की डिलीवरी: कहां खड़ी है HAL?

हालांकि 2021 में ही HAL को 83 तेजस Mark-1A विमानों का पहला ऑर्डर दिया गया था (₹46,898 करोड़), लेकिन अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं सौंपा गया है.

HAL का ताजा दावा है कि अक्टूबर 2025 तक पहले दो तेजस विमान IAF को सौंप दिए जाएंगे. यह डिलीवरी F-404 इंजन की स्थिर सप्लाई शुरू होने के बाद संभव हो रही है. अमेरिकी कंपनी GE Aviation से इन इंजनों की आपूर्ति पहले बाधित हो रही थी.

नए 97 विमानों के लिए HAL को GE से 113 और F-404 इंजन खरीदने होंगे, जिसकी लागत लगभग 1 अरब डॉलर होगी.

तेजस की ऑपरेशनल टेस्टिंग और वायुसेना की शर्तें

भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि HAL के बनाए पहले दो तेजस विमान तभी स्वीकार किए जाएंगे, जब वे निम्नलिखित परीक्षणों में सफल होंगे:

  • मिसाइल सिस्टम की सटीकता
  • लेजर-गाइडेड बम की फायरिंग दक्षता
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम की व्यवहार्यता
  • इंजन परफॉर्मेंस की विश्वसनीयता

इससे यह तय होता है कि गुणवत्ता के मामले में वायुसेना कोई समझौता नहीं करने जा रही है.

ऑपरेशन सिंदूर: पड़ोसी की तैयारी से सबक

हाल ही में पाकिस्तान ने एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन 'सिंदूर' को अंजाम दिया, जिसमें उसने चीन निर्मित J-10C लड़ाकू विमानों का प्रयोग किया. इन विमानों में लंबी दूरी की PL-15 मिसाइलें लगी थीं, जिनकी मारक क्षमता 200 किमी से अधिक बताई जा रही है.

इस ऑपरेशन के बाद भारतीय वायुसेना के अंदर समीक्षा हुई, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि अगर भारत को अपने पड़ोसियों की बढ़ती क्षमताओं का सामना करना है, तो उसे तेजस जैसे अत्याधुनिक और विश्वसनीय फाइटर जेट्स की जल्द आवश्यकता है.

CDS जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल बढ़ा

इस डील के साथ एक और अहम घटनाक्रम यह रहा कि सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 तक बढ़ा दिया है. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश की तीनों सेनाएं तकनीकी आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में हैं और एक सशक्त नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

गौरतलब है कि CDS पद की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष है, और जनरल चौहान उसी उम्र तक सेवा में रहेंगे. इससे तेजस डील और अन्य रक्षा योजनाओं की निगरानी को स्थायित्व मिलेगा.

ये भी पढ़ें- 'सोनम वांगचुक के भड़काऊ बयानों ने भीड़ को...' लद्दाख हिंसा पर गृह मंत्रालय का बयान, जानें क्या बताया