MEA On FCRA: भारत सरकार ने FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) संशोधन बिल 2026 पर अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी का जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और इस पर फैसला भारत की संसद करती है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत में विदेशी फंड के इस्तेमाल को कानून के तहत नियंत्रित किया जाता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका सहित कई देश भी अपने यहां आने वाले विदेशी फंड पर कड़ी निगरानी रखते हैं, इसलिए भारत के ऐसे नियमों पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने FCRA पर की गई टिप्पणियां देखी हैं. उन्होंने दोहराया कि भारत से जुड़े कानून और संसद में पेश होने वाले विधेयक पूरी तरह देश के अंदरूनी मामले हैं. संसद ही तय करती है कि किस कानून में क्या बदलाव होगा. उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी फंड को नियंत्रित करने के नियम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में लागू हैं.
#WATCH | Delhi: Responding to comments by a US lawmaker on the proposed Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) Amendment Bill, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "We have seen the comments on FCRA. Legislative matters concerning India are our internal affairs on which… pic.twitter.com/l3i52nrEuS
— ANI (@ANI) August 7, 2026
अमेरिकी सांसद ने क्या आरोप लगाया
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि यह बिल ईसाई समुदाय और धार्मिक संस्थाओं को प्रभावित कर सकता है. उनका दावा था कि अगर यह कानून पास हुआ तो यह भारत-अमेरिका संबंधों में चिंता का विषय बन सकता है.
राइली मूर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत में ईसाई समुदाय का इतिहास बहुत पुराना है और चर्चों तथा धार्मिक चैरिटी संस्थाओं के कामकाज में सरकारी दखल नहीं होना चाहिए.
कैथोलिक एरीना की भी प्रतिक्रिया
कैथोलिक एरीना नाम के एक संगठन ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. संगठन ने राइली मूर का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में ईसाई समुदाय को लेकर चिंता जताई जानी चाहिए.
FCRA संशोधन बिल में क्या प्रस्ताव है
भारत सरकार मानसून सत्र के दौरान FCRA संशोधन विधेयक 2026 संसद में पास कराने की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो उसके विदेशी फंड की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था की जाएगी.
नए नियमों में विदेशी चंदे के उपयोग को तय उद्देश्यों और तय राज्यों से जोड़ने का भी प्रस्ताव है. साथ ही, धार्मिक गतिविधियों में धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार को अनुमति प्राप्त गतिविधियों से बाहर रखने की बात भी कही गई है.
FCRA क्या है
FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act वह कानून है जो विदेश से मिलने वाले चंदे और उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. यह कानून पहली बार 1976 में लागू हुआ था. इसके बाद 2010 में नया कानून लाया गया और फिर 2016, 2018, 2020 और अब 2026 में इसमें संशोधन किए गए. सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
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