नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित हमले की साजिश को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. पंजाब पुलिस की जांच में दावा किया गया है कि अमृतसर से पकड़े गए एक कथित आतंकी मॉड्यूल के कुछ सदस्यों का दिल्ली कनेक्शन सामने आया है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें जंतर-मंतर पर पेट्रोल बम के जरिए पुलिस, सेना और अन्य वर्दीधारी कर्मचारियों को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, इस पूरे मामले की अलग से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी जांच कर रही है.
अमृतसर से दिल्ली पहुंचने का दावा
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी वंश कुमार ने कथित तौर पर दिल्ली ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें बताई हैं. उसके बयान के अनुसार, 25 जुलाई को देव सिंह उर्फ करण ने विशाल उर्फ गंगू को दिल्ली जाने के लिए कहा था.
आरोप है कि यात्रा के लिए पैसों की व्यवस्था की गई और उसी दिन शाम को अमृतसर रेलवे स्टेशन पर कुछ लोग इकट्ठा हुए. इसके बाद वे ट्रेन से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए.
अब जांच एजेंसियां इस पूरी कहानी को सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और दूसरे तकनीकी सबूतों से मिलाने में जुटी हैं.
जंतर-मंतर पहुंचने और संदिग्ध मुलाकात का दावा
पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि 26 जुलाई की सुबह वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से सीधे जंतर-मंतर गए.
जांच के अनुसार, आरोपियों ने एक ऐसे व्यक्ति से मिलने की बात कही है, जो उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया जा रहा है. आरोप है कि इसी व्यक्ति ने उन्हें कुछ कांच की बोतलें दीं और पेट्रोल बम तैयार करने के लिए कहा.
आरोपियों के मुताबिक, उन्हें सुरक्षा बलों और वर्दीधारी कर्मचारियों को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, इन दावों की अभी जांच की जा रही है.
हमला नहीं करने और लौटने का दावा
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि जंतर-मंतर पहुंचने के बाद उन्होंने हमला करने से इनकार कर दिया.
उनके अनुसार, उन्होंने कथित हैंडलर को फोन कर बताया कि वे इस योजना का हिस्सा नहीं बनना चाहते और सामान वहीं छोड़ रहे हैं. इसके बाद वे उसी दिन ट्रेन से वापस अमृतसर लौट गए.
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में कोई फोन कॉल पाकिस्तान में बैठे किसी व्यक्ति को किया गया था या नहीं.
सीसीटीवी और तकनीकी जांच पर जोर
इस मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी सक्रिय है. जांच टीम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों की दिल्ली यात्रा, जंतर-मंतर पहुंचने और किसी संदिग्ध व्यक्ति से मुलाकात का दावा सही है या नहीं.
इसके अलावा मोबाइल फोन रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और अन्य तकनीकी सबूतों की भी जांच की जा रही है.
यूपी के संदिग्ध व्यक्ति की तलाश
जांच एजेंसियों के सामने अब उस कथित व्यक्ति की पहचान करना भी बड़ी चुनौती है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आने की बात कही जा रही है.
स्पेशल सेल यह पता लगाने में जुटी है कि वह व्यक्ति कौन था, क्या उसका आरोपियों से पहले कोई संपर्क था और क्या दिल्ली में किसी स्थानीय नेटवर्क की मदद ली गई थी.
पहले की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला
यह मामला पंजाब पुलिस की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर आतंकी साजिश का खुलासा करने का दावा किया गया था.
पुलिस के मुताबिक, अमृतसर में हुई कार्रवाई के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य संदिग्ध सामान मिलने का दावा किया गया था.
इसी जांच के दौरान कुछ आरोपियों के जंतर-मंतर पहुंचने की बात सामने आई.
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी सच्चाई
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जंतर-मंतर पर हमले की योजना थी तो उसका असली मकसद क्या था और निशाना कौन था.
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सभी दावों की जांच कर रही हैं. सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे सबूतों के आधार पर ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.
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