Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए. भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में कई यादगार और ऐतिहासिक पल दिए. भारत ने इस बार 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते. सबसे शानदार प्रदर्शन भारतीय बॉक्सरों का रहा. बॉक्सिंग में भारत ने 7 गोल्ड और 3 सिल्वर समेत कुल 10 पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया.
50 पदकों का आंकड़ा नहीं छू सका भारत
पिछले कुछ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 50 या उससे ज्यादा पदक जीतता रहा था. लेकिन इस बार टीम 50 का आंकड़ा नहीं छू सकी. हालांकि, इस बार पदकों की संख्या से ज्यादा खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में रहा.
कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपने खेल में नया इतिहास बनाया. साथ ही इस बार कई बड़े खेल कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा भी नहीं थे, जिससे कुल पदकों की संख्या पर असर पड़ा.
भारत के यादगार पल
भारत का पहला पदक पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने दिलाया. उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला. पहला स्वर्ण पदक स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने जीता. इसके साथ ही उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड जीतने का रिकॉर्ड भी बनाया.
जूडो में अस्मिता डे ने इतिहास रचते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया. वहीं, 22 वर्षीय मुक्केबाज जादूमणि सिंह ने रजत पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग के उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखाई.
एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा पदक
भारत ने सबसे ज्यादा 16 पदक एथलेटिक्स में जीते. इनमें 3 गोल्ड, 7 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज शामिल रहे. हालांकि, सबसे ज्यादा स्वर्ण पदक बॉक्सिंग से आए, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने 7 गोल्ड अपने नाम किए. 1 अगस्त भारत के लिए सबसे खास दिन रहा. इस दिन भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में कुल 16 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया.
कई खेल इस बार नहीं हुए शामिल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्रिकेट, हॉकी और कुश्ती समेत कई खेल शामिल नहीं थे. पहले इन खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया शहर को करनी थी, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण उसने आयोजन से पीछे हटने का फैसला किया. इसके बाद ग्लासगो ने कम समय में मेजबानी की जिम्मेदारी संभाली. तैयारी के लिए समय कम होने की वजह से कई खेलों को इस बार कार्यक्रम से बाहर रखा गया.
किस खेल में कितने पदक मिले?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने कई नई उपलब्धियां हासिल कीं. भले ही कुल पदकों की संख्या पिछली बार से कम रही, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने देश को गर्व महसूस कराया.
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