अफगानिस्तान भूकंप में मरने वालों की संख्या 1400 पार, भारत ने 15 टन खाने का सामान और 1000 टेंट भेजा

अफगानिस्तान एक बार फिर विनाशकारी भूकंप की चपेट में आ गया है. रविवार की रात, जब अधिकतर लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी धरती बुरी तरह कांप उठी.

India sent 15 tonnes of food items and 1000 tents to Afghanistan
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

काबुल: अफगानिस्तान एक बार फिर विनाशकारी भूकंप की चपेट में आ गया है. रविवार की रात, जब अधिकतर लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी धरती बुरी तरह कांप उठी. रिक्टर स्केल पर 6.0 तीव्रता के इस झटके ने देश के पूर्वी हिस्से में कहर बरपा दिया. सबसे अधिक असर नांगरहार और कुनार प्रांतों में देखा गया, जहां कई गांव मलबे में तब्दील हो गए.

अब तक की जानकारी के अनुसार, इस त्रासदी में 1411 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 3250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान प्रशासन ने इस आपदा की पुष्टि करते हुए इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर मानवीय घटनाओं में से एक बताया है.

भूकंप का केंद्र और प्रभावित क्षेत्र

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जलालाबाद शहर से लगभग 17 मील (लगभग 27 किलोमीटर) दूर स्थित था. यह इलाका राजधानी काबुल से लगभग 150 किमी की दूरी पर है और पहाड़ी व कठिन भू-भागों में गिना जाता है. यहां बुनियादी ढांचा पहले से ही कमजोर है, जिससे जान-माल की हानि और भी बढ़ गई.

सबसे ज्यादा नुकसान कुनार में

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक मौतें कुनार प्रांत में हुई हैं. यह इलाका भूकंप के लिए ‘रेड ज़ोन’ माना जाता है. सोमवार को यहां एक और 4.6 तीव्रता का झटका आया, जिससे राहत और बचाव कार्य और भी चुनौतीपूर्ण हो गया.

अन्य क्षेत्रों में भी असर

भूकंप के झटके सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं रहे. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांतों में भी इन झटकों को महसूस किया गया. भारत के गुरुग्राम में भी हल्के झटके दर्ज किए गए, हालांकि भारत में किसी नुकसान की खबर नहीं है.

तालिबान सरकार ने मांगी मदद

तालिबान सरकार, जो 2021 से अफगानिस्तान की सत्ता में है, ने इस आपदा के बाद दुनियाभर से मानवीय सहायता की अपील की है. भूकंप के बाद स्थानीय संसाधनों की भारी कमी हो गई है. बचाव कार्य बेहद मुश्किल हालातों में चल रहा है न सड़कों की स्थिति अच्छी है, न ही पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं.

भारत की ओर से तेजी से राहत कार्य

भारत ने अफगानिस्तान की इस संकटपूर्ण घड़ी में मानवीयता और सहयोग की मिसाल पेश की है. अफगानिस्तान की अपील के बाद भारत सरकार ने तुरंत राहत सामग्री भेजी.

भारत से भेजी गई सहायता:

  • 1000 टेंट – ताकि बेघर हुए परिवारों को तुरंत आश्रय मिल सके.
  • 15 टन खाद्य सामग्री – जिसमें चावल, आटा, दाल, दूध पाउडर, और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थ शामिल हैं.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि भारत आगे भी जरूरत के अनुसार सहायता भेजता रहेगा. भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानवता के आधार पर उसकी मदद राजनीति या शासन की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताई संवेदना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान की इस भीषण आपदा पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने X पर लिखा, "इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं अफगानिस्तान के लोगों के साथ हैं. हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं. भारत हरसंभव सहायता देने को तैयार है."

अन्य देशों की प्रतिक्रिया

भारत के अलावा अन्य प्रमुख देशों और संगठनों ने भी अफगानिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.

चीन:

चीन ने कहा है कि वह अफगानिस्तान की जरूरतों और अपनी क्षमताओं के अनुसार सहायता प्रदान करेगा. चीन ने पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के समय अफगानिस्तान को दवाइयों और खाने-पीने की सामग्री भेजी है.

ब्रिटेन:

ब्रिटिश सरकार ने 1 मिलियन पाउंड (लगभग 10 करोड़ रुपये) की इमरजेंसी फंडिंग की घोषणा की है, जो प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल की जाएगी.

अन्य संगठन और एजेंसियां:

हालांकि तालिबान शासन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है, लेकिन रेड क्रॉस, UNICEF, WFP जैसी वैश्विक मानवीय संस्थाएं भी राहत कार्यों में सक्रिय हैं.

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