भारत ने पाकिस्तान के एक मानवीय राहत विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि इंसानी जिंदगी और मानवीय सहायता उसके लिए राजनीतिक खींचतान से कहीं अधिक अहम है. पाकिस्तान के कुछ मीडिया चैनलों द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भारत ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से अनुरोध दोपहर लगभग 1 बजे आया था और भारत ने उसी दिन शाम करीब 5:30 बजे अनुमति जारी कर दी थी.
यह विमान चक्रवात दित्वा से बाढ़ की चपेट में आए श्रीलंका तक राहत सामग्री पहुंचाने के मिशन पर था. इसलिए भारत ने बिना किसी देरी के फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत मंजूरी प्रदान की.
पाकिस्तान के दावों पर भारत का जवाब
कुछ पाकिस्तानी टीवी चैनलों में यह दावा किया जा रहा था कि भारत ने विमान की ओवरफ्लाइट क्लीयरेंस देने से इनकार कर दिया. लेकिन भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह गलत है.
भारत ने अनुरोध मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर मानवीय संकट को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर अनुमति प्रदान कर दी थी. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि मानवीय मिशनों को लेकर भारत हमेशा सहयोगात्मक रुख अपनाता है, चाहे अनुरोध किसी भी देश से आए.
चक्रवात दित्वा के बाद श्रीलंका में मची तबाही
चक्रवात दित्वा ने श्रीलंका में अत्यधिक विनाश किया है. देश के कई प्रांत अभी भी बाढ़ से डूबे हुए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक:
श्रीलंका ने आपातकाल की घोषणा की है ताकि सेना और अन्य एजेंसियाँ तेजी से राहत कार्य कर सकें. ऐसे माहौल में भारत समेत कई देश मदद पहुंचा रहे हैं.
भारत का 'सागर बंधु' मिशन फिर सक्रिय
भारत ने श्रीलंका की सहायता के लिए अपनी ओर से बड़े पैमाने पर राहत सामग्री, आपूर्ति और मानव संसाधन भेजे हैं. यह पहल ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत चलाई जा रही है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में संकट के समय भारत की मानवीय और सामुदायिक जिम्मेदारी को दर्शाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से बात कर संवेदना व्यक्त की और आश्वासन दिया कि भारत इस कठिन समय में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है. भारतीय नौसेना, NDRF और अन्य त्वरित राहत दलों को आवश्यक आपूर्तियों के साथ श्रीलंका भेजा गया है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत के इस समर्थन की प्रशंसा करते हुए कहा कि संकट के समय भारत हमेशा सबसे पहले मदद करता है.
भारत का निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत द्वारा पाकिस्तान के विमान को एयरस्पेस देना सिर्फ तकनीकी मंजूरी नहीं थी- यह कई मायनों में महत्वपूर्ण कदम था:
1. मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता का संदेश
भारत ने दिखाया कि प्राकृतिक आपदा के समय राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर इंसानी जानों को बचाना सबसे ऊपर है.
2. क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण
दक्षिण एशिया में आपदाओं के समय सहयोग आवश्यक है. यह फैसला क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय साझेदारी दोनों को मजबूत करता है.
3. अफवाहों और गलत खबरों पर लगाम
पाकिस्तान के कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा फैलाए जा रहे गलत दावों का भारत ने तथ्यात्मक जवाब दिया.
4. रिश्तों में विश्वास बनाने की पहल
संवेदनशील समय में लिया गया यह कदम भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी सकारात्मक संदेश भेजता है, भले ही दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनीतिक संबंध सीमित हों.
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