नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के टुकड़ों पर पलने वाला पाकिस्तान इस वक्त बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है. इन दिनों पाकिस्तान के कई हिस्सों में भारत की कठोर जल नीति का असर साफ दिखाई दे रहा है. दरअसल पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत सरकार द्वारा कई सख्त फैसले लिए गए थे, जिनमें सिंधु जल संधि प्रमुख रूप से शामिल है. आतंकी हमले के बाद भारत ने एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान के आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिट्टी में मिलाया तो दूसरी तरफ वाटर स्ट्राइक करके पाकिस्तानी हुक्मरानों को घुटनों पर लाने का काम किया.
पहलगाम अटैक के 14 महीने बाद भी पाकिस्तान आतंकवाद की कीमत चुका रहा है. भारत के एक्शन के बाद पहली बार पाकिस्तान को मिल रहे कम पानी का डेटा सामने आया है. यह आंकड़े पाकिस्तान के सिंधु जल आयोग के आयुक्त मेहर अली शाह द्वारा जारी किए गए हैं. जारी डेटा के मुताबिक, इस साल मई में करीब 16000 क्यूसेक कम पानी छोड़ा गया. यह सिर्फ चिनाब नदी का आंकड़ा है. मेहर अली का कहना है कि भारत के पानी रोकने से पाकिस्तान के 24 करोड़ लोग मुसीबत हैं.
चिनाब नदी का प्रवाह घटा
डॉन अखबार में लिखे संपादकीय में मेहर अली शाह ने कहा, "मई 2025 के बाद से ही पानी के प्रवाह में कमी देखी जा रही है. हमें पहले लग रहा था कि यह ठीक हो जाएगा, लेकिन अब जो आंकड़े आए हैं, वो काफी चौंकाने वाले हैं. अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान जल संधि को निलंबित कर दिया था." उन्होंने कहा कि, "भारत ने चिनाब नदी के पानी को व्यास की तरफ मोड़ दिया, जिसके कारण पानी का प्रवाह कम हो गया है. इसके कारण पाकिस्तान के मराला पर मई 2025 में चिनाब नदी का प्रवाह बिना वर्षा के 78,276 क्यूसेक से घटकर 1,527 क्यूसेक रह गया."
दावा है कि भारत ने चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव किया है, जिससे उसके हिस्से में पहुंचने वाले पानी की मात्रा में कमी आई है. दूसरी ओर, भारत लंबे समय से सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकारों के अनुरूप जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देता रहा है.
चिनाब के पानी को भारत ने मोड़ा
सिंधु जल आयोग के आयुक्त मेहर अली शाह के अनुसार, भारत द्वारा चिनाब नदी के पानी का रुख व्यास नदी की ओर मोड़े जाने के बाद पाकिस्तान में पहुंचने वाले पानी की मात्रा में लगातार कमी देखी गई है. आंकड़ों के मुताबिक, मई 2025 में पाकिस्तान के मराला हेडवर्क्स के पास चिनाब नदी का जल प्रवाह बिना वर्षा की स्थिति में 78,276 क्यूसेक से घटकर केवल 1,527 क्यूसेक रह गया. इसके बाद दिसंबर 2025 में यह और कम होकर 870 क्यूसेक तक पहुंच गया.
वहीं वर्ष 2026 में भी इसी तरह का असर देखने को मिला. मई 2026 के दौरान मराला क्षेत्र में जल प्रवाह 21,887 क्यूसेक से घटकर 5,689 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया. यानी इस अवधि में पाकिस्तान को करीब 16,000 क्यूसेक कम पानी मिला. पाकिस्तानी पक्ष का यह भी कहना है कि भारत के जल प्रबंधन संबंधी फैसलों से पहले पाकिस्तान को औसतन 46,000 से 48,000 क्यूसेक पानी प्राप्त होता था.
मेहर अली शाह के मुताबिक, यदि भविष्य में इन नदियों के जल प्रवाह में और कमी आती है तो देश के सामने गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है. उनका दावा है कि भारत सिंधु, चिनाब और अन्य पश्चिमी नदियों पर विभिन्न परियोजनाओं और बांधों के जरिए जल प्रबंधन की क्षमता बढ़ा रहा है. यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो पाकिस्तान के लिए उपलब्ध पानी में और कमी आ सकती है.
कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर आधारित है. खेतों की सिंचाई के लिए इन्हीं नदियों के पानी का उपयोग किया जाता है. ऐसे में जल प्रवाह कम होने का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है.
पाकिस्तानी पक्ष का मानना है कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर आर्थिक गतिविधियों और खाद्य उत्पादन दोनों पर दिखाई दे सकता है.
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