BrahMos-NG: कम वजन, ज्यादा रेंज, सटीक हमला... अब तेजस-सुखोई से भी तबाही मचाएगा ब्रह्मोस का नया अवतार

भारत और रूस की साझेदारी से बनी दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) अब नए और ज्यादा एडवांस अवतार में आने वाली है. इस नए संस्करण का नाम ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) है.

BrahMos NG Lower weight greater range precision strikes the new avatar of BrahMos
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

BrahMos-NG: भारत और रूस की साझेदारी से बनी दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस (BrahMos) अब नए और ज्यादा एडवांस अवतार में आने वाली है. इस नए संस्करण का नाम ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) है.

नई मिसाइल पहले के मुकाबले काफी हल्की, छोटी और आधुनिक तकनीक से लैस होगी. सबसे खास बात यह है कि वजन कम होने के बावजूद इसकी ताकत और मारक क्षमता कम नहीं होगी. बल्कि इसे इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह पहले से ज्यादा तेज, ज्यादा सटीक और दुश्मन के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो.

नई ब्रह्मोस-एनजी भारतीय वायुसेना, नौसेना और थलसेना तीनों की ताकत बढ़ाएगी. साथ ही इसकी वजह से भारत के रक्षा निर्यात (Defence Export) को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

मौजूदा ब्रह्मोस से कितनी अलग होगी BrahMos-NG?

अभी इस्तेमाल की जा रही ब्रह्मोस मिसाइल का वजन करीब 3 टन है. इसी वजह से इसे हर लड़ाकू विमान या छोटे युद्धपोत पर तैनात करना आसान नहीं होता.

नई BrahMos-NG का वजन करीब 1.2 टन होगा. यानी यह मौजूदा मिसाइल के मुकाबले आधे से भी कम वजन की होगी.

वजन कम होने से इसे ज्यादा प्लेटफॉर्म पर आसानी से लगाया जा सकेगा और लड़ाकू विमान एक साथ ज्यादा मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकेंगे.

हल्की होगी, लेकिन ताकत पहले से ज्यादा

नई ब्रह्मोस-एनजी का आकार छोटा जरूर होगा, लेकिन इसकी ताकत में कोई कमी नहीं होगी.

इसमें नई पीढ़ी की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. मिसाइल को एडवांस कंपोजिट मैटेरियल से बनाया जाएगा, जिससे वजन कम होगा और इसकी गति व प्रदर्शन बेहतर होगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में भी पहले से ज्यादा सक्षम होगी.

BrahMos और BrahMos-NG में क्या होगा अंतर?

फाइटर जेट की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी

मौजूदा ब्रह्मोस का वजन ज्यादा होने के कारण सुखोई-30 MKI जैसे बड़े लड़ाकू विमान भी सीमित संख्या में ही इसे लेकर उड़ सकते हैं.

लेकिन BrahMos-NG के आने के बाद हालात पूरी तरह बदल जाएंगे.

कम वजन होने की वजह से सुखोई-30 MKI एक ही उड़ान में पहले से ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा. इसका मतलब है कि युद्ध के दौरान एक ही मिशन में कई लक्ष्यों पर हमला किया जा सकेगा.

तेजस और मिग-29K पर भी होगी तैनाती

नई ब्रह्मोस-एनजी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सिर्फ बड़े विमानों तक सीमित नहीं रखा जाएगा.

इसे भारत के हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस, मिग-29K, छोटे नौसैनिक जहाजों और कुछ पनडुब्बियों पर भी आसानी से लगाया जा सकेगा.

इससे भारतीय सेना के पास हमले के कई नए विकल्प उपलब्ध होंगे.

रेंज भी होगी पहले से ज्यादा

मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल की स्ट्राइक रेंज 450 किलोमीटर से ज्यादा है.

वहीं, BrahMos-NG को लेकर भविष्य में इसकी रेंज लगभग 1,500 किलोमीटर तक बढ़ाने की चर्चा भी चल रही है.

हालांकि अंतिम रेंज का आधिकारिक ऐलान अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि नई मिसाइल लंबी दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होगी.

स्टील्थ तकनीक से दुश्मन को होगा बड़ा नुकसान

नई मिसाइल में एडवांस स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.

इसका मतलब है कि दुश्मन के आधुनिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे समय रहते पकड़ना काफी मुश्किल होगा.

यही वजह है कि BrahMos-NG को पहले से ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है.

पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम

भारत अब ब्रह्मोस मिसाइल के ज्यादा से ज्यादा हिस्से देश में ही बना रहा है.

पहले इसके कई अहम पार्ट रूस से आते थे, लेकिन अब उनका उत्पादन भारत में शुरू हो चुका है.

ब्रह्मोस का बूस्टर अब पूरी तरह भारत में तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा अब वारहेड को भी स्वदेशी बनाने की तैयारी चल रही है.

इससे भारत की विदेशों पर निर्भरता कम होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी.

कीमत में भी आएगी बड़ी कमी

स्वदेशी तकनीक बढ़ने का फायदा सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, नए डिजाइन और वैल्यू इंजीनियरिंग की वजह से कच्चे माल की लागत कम हुई है. कई कंपोनेंट भी अब कम कीमत में तैयार किए जा रहे हैं.

इसी वजह से अगले दो वर्षों में BrahMos-NG की कुल लागत में लगभग 20 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है.

इससे भारतीय सेना को भी फायदा मिलेगा और विदेशी देशों के लिए भी यह मिसाइल ज्यादा आकर्षक बनेगी.

विदेशों में बढ़ रही ब्रह्मोस की मांग

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की मांग लगातार बढ़ रही है.

फिलीपींस के साथ मिसाइल निर्यात का समझौता होने के बाद अब कई अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द इस पर मुहर लग सकती है.

इसके अलावा इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के साथ भी भारत की बातचीत आगे बढ़ रही है.

अगर ये समझौते पूरे होते हैं, तो भारत का रक्षा निर्यात और मजबूत होगा.

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