LAC पर बढ़ेगी सेना की ताकत, भारत ने भूटान के करीब डोकलाम में बनाई रोड, चीन को चेक एंड मेट की तैयारी!

दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत ने भूटान के भीतर एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऑल वेदर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है.

India built a road in Doklam close to Bhutan China is upset
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत ने भूटान के भीतर एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऑल वेदर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है. यह सड़क न केवल भूटान के लिए बुनियादी ढांचे की दृष्टि से एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत की सामरिक रणनीति में भी एक निर्णायक प्रगति के रूप में देखी जा रही है. इस परियोजना का उद्देश्य महज क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह चीन की गतिविधियों पर रणनीतिक संतुलन स्थापित करने का हिस्सा है.

डोकलाम के समीप, चीन की निगाहों के सामने

इस सड़क का निर्माण भूटान की हा वैली तक हुआ है, जो डोकलाम से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. डोकलाम वही क्षेत्र है जो 2017 में भारत और चीन के बीच 72 दिनों तक चले सैन्य गतिरोध का केंद्र बना था. भारत द्वारा बनाई गई यह ऑल वेदर रोड, भूटान के पश्चिमी क्षेत्र को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चुंबी वैली से जोड़ती है, जो तिब्बत ऑटोनोमस रीजन में स्थित है और जहां चीन की सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ रही है.

यह सड़क भूटानी सेना के लिए चुंबी वैली बॉर्डर तक जल्दी पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करेगी और आवश्यक होने पर भारत और भूटान की संयुक्त सैन्य तैयारियों को भी गति दे सकेगी. इसके अलावा, यह मार्ग लॉजिस्टिक सप्लाई और सैनिकों की मूवमेंट के लिए हर मौसम में उपयुक्त बना दिया गया है.

254 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया मार्ग

इस परियोजना को भारत की बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने प्रोजेक्ट दंतक के तहत तैयार किया है. निर्माण कार्य में 254 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसमें पाँच नए पुलों का निर्माण भी शामिल है, जिससे यह मार्ग तकनीकी और संरचनात्मक दृष्टि से और अधिक सक्षम बन गया है. यह सड़क 1 अगस्त को भूटान के प्रधानमंत्री ल्योनचेन दशो त्शेरिंग द्वारा औपचारिक रूप से उद्घाटित की जाएगी.

BRO वर्ष 1961 से भूटान में सक्रिय है और देश के दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी सुधारने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. यह परियोजना उसी प्रयास का विस्तार है, लेकिन इस बार इसका सामरिक महत्व अधिक है.

भारत और भूटान की साझेदारी

भारत और भूटान के संबंध ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ और विश्वास पर आधारित रहे हैं. डोकलाम संकट के दौरान भी भूटान ने चीन के दबाव को अस्वीकार करते हुए भारत के साथ समन्वय बनाए रखा था. ऐसे में इस नई सड़क से न केवल भूटान को अपनी क्षेत्रीय रक्षा क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति को भी ठोस आधार मिलेगा.

स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भूटान की सीमाओं पर मजबूत आधारभूत ढांचे से भारत को सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में खतरे का पूर्वानुमान लगाने और उस पर समय रहते प्रतिक्रिया देने में आसानी होगी.

डोकलाम का सामरिक महत्व और 2017 का गतिरोध

डोकलाम वह स्थल है जहां भारत, भूटान और चीन की सीमाएं मिलती हैं, जिसे ‘ट्राई-जंक्शन’ कहा जाता है. 2017 में चीन द्वारा जामफेरी रिज तक सड़क निर्माण की कोशिश ने भारत की सुरक्षा को सीधे चुनौती दी थी. यदि चीन को उस रिज तक पहुँचने दिया जाता, तो वह भारतीय सेना के डोकला पोस्ट और सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सीधी निगरानी कर सकता था.

ऑपरेशन जूनिपर के तहत भारतीय सेना ने तत्परता दिखाते हुए वहां फौरन पहुंचकर ह्यूमन चेन बनाकर चीनी सैनिकों को रोक दिया था. इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में एक कूटनीतिक संकट पैदा कर दिया था, जो अंततः 72 दिनों के बाद समाप्त हुआ जब चीन को पीछे हटना पड़ा.

हालांकि, उस घटना के बाद से चीन ने डोकलाम क्षेत्र में स्थायी सैन्य ढांचा, हेलिपैड और 600 से अधिक सैनिकों की तैनाती के ज़रिए अपनी स्थिति को मजबूत किया है. भारत की यह नई सड़क उसी के जवाब में एक रणनीतिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है.

सिलिगुड़ी कॉरिडोर: भारत की जीवन रेखा

इस संदर्भ में सिलिगुड़ी कॉरिडोर का महत्व विशेष रूप से समझना आवश्यक है. यह लगभग 20 से 25 किलोमीटर चौड़ा भूमि मार्ग पूरे उत्तर-पूर्वी भारत को शेष भारत से जोड़ता है. चीन की रणनीति यदि इस इलाके तक पहुंच बनाने की होती है, तो वह भारत के लिए गंभीर सामरिक संकट उत्पन्न कर सकती है.

इसलिए, डोकलाम और उससे सटे क्षेत्रों में भारत और उसके सहयोगियों विशेषकर भूटान की सैन्य और नागरिक आधारभूत संरचना का सशक्त होना अत्यावश्यक है. इस सड़क का निर्माण उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है.

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