2008 अहमदाबाद ब्लास्ट केस में गुजरात HC का बड़ा फैसला; 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, 56 लोगों की गई थी जान

Ahmedabad Serial Blast Case: गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है. इससे पहले सेशंस कोर्ट ने इन्हें मृत्युदंड और 11 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

Gujarat HC major verdict in the 2008 Ahmedabad blast case death sentences of 38 convicts upheld
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Ahmedabad Serial Blast Case: गुजरात हाई कोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है. यह फैसला उस पुष्टि याचिका पर आया है, जिसे राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय की पुष्टि के लिए दायर किया था. इस मामले में पहले अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने 38 दोषियों को मृत्युदंड और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अब हाई कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है.

13 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली. वर्ष 2009 में दर्ज हुए इस मुकदमे में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला. करीब 13 साल तक चली सुनवाई के बाद 18 फरवरी 2022 को सेशंस कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. ट्रायल कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी माना, जिनमें 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई. वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया.

हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?

सेशंस कोर्ट के फैसले के बाद गुजरात सरकार ने 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा की न्यायिक पुष्टि के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. भारतीय कानून के अनुसार, ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर हाई कोर्ट की मंजूरी आवश्यक होती है. दूसरी ओर, दोषी करार दिए गए 48 आरोपियों ने भी अपनी सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने का निर्णय सुनाया.

26 जुलाई 2008 को दहल उठा था अहमदाबाद

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में कुछ ही मिनटों के अंतराल पर 20 अलग-अलग स्थानों पर 21 बम धमाके हुए थे. इन सिलसिलेवार विस्फोटों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे. इस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.

जांच में सामने आए कई राज्यों के आरोपी

जांच एजेंसियों ने शुरुआत में 99 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से 82 को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों का संबंध गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों से बताया गया था.

हजारों सबूत और गवाहों के आधार पर हुआ फैसला

यह मामला देश के सबसे बड़े आपराधिक मुकदमों में गिना जाता है. अदालत के सामने लगभग 6 हजार दस्तावेजी और अन्य प्रकार के साक्ष्य पेश किए गए, जबकि 1,163 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. सेशंस कोर्ट का फैसला करीब 7 हजार पन्नों का था और पूरे मामले की केस फाइल लगभग 7.88 लाख पन्नों तक पहुंच गई थी. अब गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में एक और महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पूरा हो गया है.

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