एक लीटर तेल में कितनी उड़ान भरता है फाइटर जेट? माइलेज सुनकर रह जाएंगे हैरान! जंग के बीच जानें जवाब

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और हवाई गतिविधियों ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर लड़ाकू विमानों की ताकत और क्षमता की ओर खींचा है.

How much does a fighter jet fly in one liter of oil fighter jet mileage
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और हवाई गतिविधियों ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर लड़ाकू विमानों की ताकत और क्षमता की ओर खींचा है. आमतौर पर हम कार या बाइक का माइलेज किलोमीटर प्रति लीटर में मापते हैं, लेकिन फाइटर जेट की दुनिया पूरी तरह अलग होती है.

यहां माइलेज किलोमीटर में नहीं, बल्कि मीटर में मापा जाता है. दरअसल, फाइटर जेट इतने ज्यादा ईंधन की खपत करते हैं कि उनका माइलेज सुनकर कोई भी चौंक सकता है.

कितना माइलेज देता है फाइटर जेट?

अगर मध्यम श्रेणी के लड़ाकू विमानों की बात करें, जैसे राफेल या एफ-16, तो सामान्य उड़ान (क्रूजिंग स्पीड) के दौरान ये विमान 1 लीटर ईंधन में सिर्फ लगभग 300 से 400 मीटर तक ही उड़ पाते हैं.

इसका मतलब है कि 1 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए करीब 2.5 से 3 लीटर ईंधन की जरूरत पड़ती है.

यानी अगर किसी मिशन में 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी हो, तो केवल वहां पहुंचने के लिए ही लगभग 300 लीटर ईंधन की आवश्यकता होगी.

आफ्टरबर्नर चालू होते ही बढ़ जाती है खपत

युद्ध के दौरान जब पायलट को अचानक तेज गति पकड़नी होती है या दुश्मन के हमले से बचना होता है, तब वह आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल करता है. आफ्टरबर्नर इंजन को अतिरिक्त ताकत देने के लिए सीधे एग्जॉस्ट में ईंधन डालता है, जिससे विमान की स्पीड बहुत तेजी से बढ़ जाती है.

लेकिन इसका असर ईंधन खपत पर भी पड़ता है. आफ्टरबर्नर चालू होने पर ईंधन की खपत 3 से 4 गुना तक बढ़ जाती है और माइलेज घटकर 100 मीटर प्रति लीटर से भी कम रह जाता है. इस स्थिति में जेट कुछ ही सेकंड में कई लीटर ईंधन जला देता है.

भारी और हल्के जेट में कितना अंतर?

हर फाइटर जेट की ईंधन खपत एक जैसी नहीं होती.

भारी और दो इंजन वाले विमान, जैसे एफ-22 रैप्टर या सुखोई-30 एमकेआई, ज्यादा ईंधन खर्च करते हैं. उदाहरण के तौर पर एफ-22 एक घंटे की उड़ान में करीब 8,000 से 10,000 लीटर तक ईंधन जला सकता है.

वहीं हल्के और सिंगल इंजन वाले विमान, जैसे भारत का तेजस या स्वीडन का ग्रिपेन, अपेक्षाकृत कम ईंधन खर्च करते हैं. इनकी खपत लगभग 2,000 से 3,000 लीटर प्रति घंटा के बीच रहती है. इस वजह से हल्के जेट ज्यादा समय तक हवा में टिके रह सकते हैं.

युद्ध में ईंधन क्यों होता है अहम?

लड़ाई के दौरान ईंधन सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. कम माइलेज के कारण फाइटर जेट्स को अक्सर हवा में ही ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की जरूरत पड़ती है. अगर मिशन के दौरान ज्यादा ईंधन खर्च हो जाए, खासकर आफ्टरबर्नर के इस्तेमाल से, तो विमान को मिशन अधूरा छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है.

इसी वजह से आधुनिक फाइटर जेट्स को डिजाइन करते समय उनकी ईंधन क्षमता और दक्षता पर खास ध्यान दिया जाता है, ताकि वे कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय कर सकें और लंबे समय तक ऑपरेशन में बने रह सकें.

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