15 अगस्त 2025 को दुनिया की निगाहें एक बार फिर अलास्का पर टिक जाएंगी, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सात साल बाद एक ऐतिहासिक मुलाकात के लिए आमने-सामने होंगे. यह बैठक न सिर्फ दो महाशक्तियों के नेताओं की भेंट है, बल्कि वैश्विक शांति की दिशा में एक नया अध्याय लिखने की संभावित शुरुआत भी मानी जा रही है.
यह बैठक अमेरिका के अलास्का राज्य के एंकरेज शहर स्थित एलमेंडॉर्फ-रिचर्डसन मिलिट्री बेस पर होगी. यह वही जगह है जहां 1971 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जापान के सम्राट हिरोहितो की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी. अब, दशकों बाद, फिर से यह सैन्य बेस दो विश्व नेताओं की अहम वार्ता का साक्षी बनने जा रहा है.
एकांत में संवाद, सुरक्षा चाक-चौबंद
ट्रंप और पुतिन के बीच यह बातचीत पूरी तरह गोपनीय होगी, जिसमें सिर्फ एक अनुवादक मौजूद रहेगा. बैठक के बाद दोनों नेताओं द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, लेकिन बातचीत की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की जाएगी.
सुरक्षा के लिहाज से इस बैठक को किसी सैन्य ऑपरेशन की तरह तैयार किया गया है. बेस के चारों ओर 300 किलोमीटर के दायरे में नो-फ्लाई ज़ोन लागू रहेगा. साइबर सुरक्षा के तहत संपूर्ण नेटवर्क को इंटरनेट से पूरी तरह काट दिया गया है. अमेरिका की स्पेशल फोर्सेज, सीक्रेट सर्विस, मिलिट्री पुलिस और नेशनल गार्ड की दोहरी सुरक्षा परत तैनात की गई है.
वहीं, रूस की ओर से भी सुरक्षा में कोई कोताही नहीं रखी जा रही. पुतिन की आर्मर्ड लिमोज़िन ‘ऑरस सेनट’ पहले ही एयरलिफ्ट होकर बेस पहुंच चुकी है. उनके साथ FSO यानी ‘फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस’ की विशेष टीम भी तैनात रहेगी. रूसी सेना ने अलास्का से 88 किलोमीटर दूर आनादिर में फाइटर जेट्स भी स्टैंडबाय पर रखे हैं.
बैठक का मकसद- यूक्रेन युद्ध का अंत
2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को चिंता में डाल रखा है. ट्रंप अपने चुनावी प्रचार के दौरान कई बार यह दावा कर चुके हैं कि वे सत्ता में आने के 24 घंटे के भीतर युद्ध समाप्त करवा सकते हैं. अब उन्हें राष्ट्रपति बने छह महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन युद्ध जारी है. इसीलिए यह मुलाकात उनके वादे को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
हालांकि, व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि यह मीटिंग युद्धविराम का सीधा एलान नहीं, बल्कि एक संभावित रोडमैप की तलाश का प्रयास है.
कैसे बनी यह मुलाकात की योजना
रूस ने हाल ही में यूक्रेन पर हवाई हमले तेज कर दिए थे, जिसके चलते ट्रंप ने पुतिन को 50 दिन की समय सीमा देते हुए ‘शांति प्रस्ताव’ पर विचार करने को कहा था. 8 अगस्त को यह डेडलाइन समाप्त हो गई. उससे दो दिन पहले अमेरिकी विशेष दूत मॉस्को पहुंचे और पुतिन से मुलाकात की. यहीं से ट्रंप-पुतिन बैठक की नींव रखी गई.
पुतिन अलास्का में क्यों मिलना चाहते हैं?
इस बैठक के लिए अलास्का को चुने जाने के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं. अलास्का की सीमाएं रूस के पूर्वी हिस्से से केवल 90 किलोमीटर दूर हैं, जिससे पुतिन को बिना किसी 'दुश्मन देश' के हवाई क्षेत्र से गुजरे सीधे वहां पहुंचने की सुविधा मिलती है. यह भूगोलिक निकटता रूस के लिए सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम है.
इसके अलावा, अलास्का यूक्रेन और यूरोप से भी काफी दूर है. पुतिन नहीं चाहते कि यूक्रेन या यूरोपीय संघ के नेता इस वार्ता में हस्तक्षेप करें. वे अमेरिका से सीधे बात करना चाहते हैं बिना किसी मध्यस्थ के.
यूक्रेन युद्ध पर पुतिन और जेलेंस्की की स्थितियां
रूस इस समय यूक्रेन के करीब 20% भूभाग पर कब्जा कर चुका है, जिसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज़िया जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं. पुतिन स्पष्ट कर चुके हैं कि वे इन क्षेत्रों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और इन पर रूस का ‘ऐतिहासिक अधिकार’ मानते हैं.
दूसरी ओर, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने साफ शब्दों में कहा है कि वे यूक्रेन की एक इंच ज़मीन भी नहीं छोड़ेंगे. उनका तर्क है कि अगर आज यूक्रेन पीछे हटेगा, तो कल रूस का दुस्साहस और बढ़ेगा.
क्या हो सकती है समझौते की राह?
13 अगस्त को ट्रंप ने जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से वर्चुअल बातचीत की थी. उस बातचीत में उन्होंने जमीन के अदला-बदली के विकल्प की बात छेड़ी थी. हालांकि जेलेंस्की ने बिना शर्त युद्धविराम की मांग की और कहा कि कोई भी क्षेत्र रूस को सौंपना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने ट्रंप से सुरक्षा गारंटी की मांग भी रखी.
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