Pakistan-Afghanistan Conflict: अफगानिस्तान में अगस्त 2021 में जब तालिबान ने सत्ता पर कब्जा किया था, तब सबसे ज्यादा खुशी अगर किसी देश में दिखाई दी थी तो वह पाकिस्तान था. उस समय पाकिस्तान के नेताओं को लग रहा था कि अब काबुल में उनकी पसंद की सरकार बन गई है और दोनों देशों के रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होंगे. पाकिस्तान के तत्कालीन गृह मंत्री शेख रशीद अहमद ने तो अफगानिस्तान सीमा पर जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी और तालिबान सरकार का खुलकर समर्थन किया था. उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान थे और माना जा रहा था कि इस नए समीकरण से पाकिस्तान को क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा फायदा मिलेगा.
लेकिन यह दोस्ती ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी. कुछ ही सालों में दोनों देशों के बीच रिश्ते इतने खराब हो गए कि सीमा पर लगातार गोलीबारी, हवाई हमले और तनाव की खबरें आने लगीं. आज हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान कई बार अफगानिस्तान की सीमा के अंदर तक कार्रवाई करता है, जबकि तालिबान सरकार भी पाकिस्तान पर लगातार आरोप लगाती रहती है. सवाल यह है कि आखिर दोनों पड़ोसी देशों के रिश्ते इतने खराब क्यों हो गए? इसकी सबसे बड़ी वजह है एक पुराना सीमा विवाद, जिसे डूरंड लाइन कहा जाता है.
क्या है डूरंड लाइन?
डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच करीब 2,670 किलोमीटर लंबी सीमा है. यह चीन की सीमा से शुरू होकर ईरान तक जाती है. इस सीमा का इतिहास 130 साल से भी ज्यादा पुराना है.
साल 1893 में ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और उस समय के अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक समझौता हुआ था. इसी समझौते के तहत यह सीमा तय की गई थी. उस समय भारत और पाकिस्तान अलग-अलग देश नहीं थे. पूरा इलाका ब्रिटिश शासन के अधीन था और अंग्रेज अफगानिस्तान को रूस के प्रभाव से दूर रखने के लिए एक बफर ज़ोन बनाना चाहते थे. इसी रणनीति के तहत उन्होंने यह सीमा खींच दी.
1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना, तब यही डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा बन गई. लेकिन अफगानिस्तान ने कभी भी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया.
क्यों है इस सीमा पर विवाद?
डूरंड लाइन का सबसे ज्यादा असर पश्तून समुदाय पर पड़ा. पश्तून अफगानिस्तान की सबसे बड़ी जातीय आबादी माने जाते हैं. वहीं पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में भी बड़ी संख्या में पश्तून रहते हैं.
जब यह सीमा बनाई गई तो हजारों परिवार, कबीले और गांव दो हिस्सों में बंट गए. पहले लोग बिना किसी रोक-टोक के एक-दूसरे के यहां आते-जाते थे, लेकिन सीमा बनने के बाद उनके बीच दीवार खड़ी हो गई.
आज भी कई पश्तून मानते हैं कि अंग्रेजों ने जानबूझकर उनकी आबादी को दो हिस्सों में बांटा ताकि उनका प्रभाव कमजोर हो जाए. यही वजह है कि डूरंड लाइन को लेकर उनके मन में आज भी नाराजगी है.
तालिबान इस लाइन को क्यों नहीं मानता?
2021 में सत्ता में आने के बाद तालिबान ने साफ कर दिया कि वह डूरंड लाइन को स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता.
तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान ने सीमा पर जो बाड़ लगाई है, उससे एक ही परिवार के लोग अलग हो गए हैं. उनका दावा है कि यह बाड़ शांति नहीं बल्कि तनाव बढ़ा रही है.
दूसरी तरफ पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पर बाड़ लगाना उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तरफ से आतंकवादी उसके इलाके में घुस आते हैं, इसलिए मजबूत सीमा सुरक्षा जरूरी है.
यहीं से दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ जाता है.
दोस्ती दुश्मनी में कैसे बदली?
जब तालिबान सत्ता में आया था, तब पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अब अफगानिस्तान उसका सबसे करीबी सहयोगी बनेगा. लेकिन कुछ ही समय बाद दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आने लगे.
पाकिस्तान चाहता था कि तालिबान डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान ले और सीमा पर लगी बाड़ का विरोध न करे. लेकिन तालिबान ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
इसके अलावा पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकी संगठन उसके सैनिकों और नागरिकों पर हमले करते हैं. वहीं तालिबान सरकार पाकिस्तान पर सीमा पार हमले करने और आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोप लगाती है.
दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है.
सीमा पर क्यों बढ़ता रहता है तनाव?
डूरंड लाइन पर कई जगह ऐसी हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने रहती हैं. छोटी-सी घटना भी कई बार बड़ी झड़प में बदल जाती है.
पाकिस्तान ने सीमा पर कई चौकियां और सुरक्षा बाड़ बनाई हैं, लेकिन तालिबान कई बार इसका विरोध करता है. इसी वजह से दोनों देशों के सैनिकों के बीच फायरिंग की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं.
इस विवाद का असर सिर्फ सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि व्यापार और लोगों की आवाजाही पर भी पड़ता है. कई बार सीमा बंद होने से व्यापार रुक जाता है और हजारों लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है.
पाकिस्तान की चिंता क्यों बढ़ी?
पाकिस्तान के लिए यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है. उसे डर रहता है कि अफगानिस्तान की तरफ से आतंकी संगठन उसके इलाके में घुस सकते हैं.
वहीं तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के नाम पर पश्तून इलाकों में सख्ती करता है और सीमा पर जरूरत से ज्यादा सैन्य कार्रवाई करता है.
इसी वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी लगातार बढ़ती जा रही है.
क्या कभी खत्म होगा यह विवाद?
डूरंड लाइन सिर्फ एक सीमा रेखा नहीं है, बल्कि यह इतिहास, राजनीति और लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बन चुका है. एक तरफ पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि दूसरी तरफ अफगानिस्तान और बड़ी संख्या में पश्तून इसे स्वीकार नहीं करते.
यही कारण है कि तीन दशक से ज्यादा समय से यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों पर भारी पड़ा हुआ है. जब तक इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कोई स्थायी और आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकलता, तब तक सीमा पर तनाव और अविश्वास बने रहने की आशंका रहेगी.
कुल मिलाकर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आज जो दुश्मनी दिखाई देती है, उसकी जड़ सिर्फ मौजूदा राजनीति या तालिबान नहीं है. इसकी असली वजह 1893 में खींची गई डूरंड लाइन है, जिसने एक ही समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया. यही विवाद आज भी दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव और टकराव की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है.